नई दिल्ली(एजेंसी):इन दिनों रेस्टोरेंट और कैफे में भले ही महंगी बेक्ड कुकीज का ट्रेंड बढ़ गया हो लेकिन यह गली-मोहल्लों में बिकने वाली नानखटाई के आगे आज भी फेल है। मुंह में घुल जाने वाली यह नानखटाई को देखकर जरूर लगता है कि यह एक देसी बिस्किट है पर बहुत कम लोग इसके बनने की कहानी जानते हैं। दरअसल, इसका इतिहास जितना पुराना है, उतना ही किसी फिल्मी कहानी जैसा भी है। आइए आपको देसी कुकी नानखटाई की कहानी बताते हैं।
नानखटाई बनने की कहानी
एक समय था जब गुजरात के शहर सूरत में डच और पारसी व्यापारियों का बड़ा वर्ग निवास करता था। जब डच भारत आए तो वो अपने साथ खानपान की चीजें और तकनीक भी लेकर आए थे, जैसे कि बेकिंग और ब्रेड। उन्होंने यहां अपने चाय के साथ खाए जाने वाले स्नैक ‘कोयके’ की कमी पूरी करने के लिए एक बेकरी खोल ली।
बताते चलें कि उस समय कोयके में अंडे और ताड़ी का इस्तेमाल होता था। कहते हैं जब तक डच यहां रहे तब तक यह बेकरी लोगों के बीच सुर्खियों में रही, पर उनके जाने के बाद इसके हालात एकदम बदल गए।





















































