संयुक्त राष्ट्र(एजेंसी):संयुक्त राष्ट्र के गलियारों में इस समय कूटनीतिक हलचल अपने चरम पर है। मौजूदा समय में दुनिया भर में सुलगते संघर्षों और गहरे भू-राजनीतिक संकटों के साए के बीच, संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र का आगाज आठ सितंबर से हो रहा है। इस प्रतिष्ठित वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर 26 सितंबर को दोपहर के सत्र में दुनिया को संबोधित करेंगे।
यह सत्र ऐसे नाजुक दौर में हो रहा है जब दुनिया अनेक मोर्चों पर गहरे तनाव से गुजर रही है। विशेषकर, अमेरिका और इजराइल के नेतृत्व में ईरान के विरुद्ध चल रहे संघर्ष ने वैश्विक शांति को झकझोर कर रख दिया है। इस युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार हो रहे व्यवधानों से ईंधन और खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छू रही हैं।
भारत बन रहा कम विकसित देशों की आवाज
ग्लोबल साउथ और सबसे कम विकसित देश इस आर्थिक मार के सबसे बड़े शिकार बने हैं, जिनकी पीड़ा और चिंताओं को भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पुरजोर तरीके से उठाता रहा है। महासभा का यह उच्च स्तरीय सत्र केवल भाषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवता के भविष्य को तय करने वाले गंभीर मंथन का गवाह बनेगा।
सत्र में क्या-क्या होगा खास?
सत्र के दौरान जलवायु परिवर्तन के आसन्न खतरों, समुद्र जलस्तर बढ़ने से उपजे अस्तित्व के संकट, और महामारी से निपटने की तैयारियों पर उच्च स्तरीय बैठकें होंगी। इसके साथ ही, परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस और ‘विकास के अधिकार की घोषणा’ की 40वीं वर्षगांठ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे।
ब्राजील के संबोधन से होगी आम बहस की शुरुआत
परंपरा के अनुसार, महासभा की आम बहस की शुरुआत 22 सितंबर को ब्राजील के संबोधन से होगी, जिसके तुरंत बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने विचार रखेंगे। इस बार 193 सदस्यीय इस संगठन के 81वें सत्र की अध्यक्षता बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान कर रहे हैं।
पड़ोसी देशों की बात करें तो बांग्लादेश और नेपाल के शासनाध्यक्ष 24 सितंबर को, जबकि पाकिस्तान 25 सितंबर को महासभा को संबोधित करेगा। ऐसे समय में जब दुनिया बारूद के ढेर पर बैठी है और मानवता आर्थिक व सुरक्षा संकटों से जूझ रही है, विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यह संबोधन केवल भारत का पक्ष रखना नहीं होगा, बल्कि यह दुनिया के वंचित और पीड़ित देशों की आवाज को वैश्विक पटल पर बुलंद करने का एक ऐतिहासिक अवसर साबित होगा।





















































