नई दिल्ली(एजेंसी):पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब दुनिया के दूसरे देशों पर भी साफ दिखने लगा है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले महीने आसान नहीं होंगे।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह युद्ध वैश्विक स्तर पर आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है और इसका असर आम लोगों पर पड़ रहा है। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार हालात से निपटने के लिए लगातार कदम उठा रही है, लेकिन किसी भी सरकार के लिए इस तरह के वैश्विक संकट को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार देश को इस संकट के बुरे असर से बचाने की पूरी कोशिश करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अनिश्चित हालात के बीच ऑस्ट्रेलिया मिलकर इन चुनौतियों का सामना करेगा और लोगों को एक-दूसरे का सहयोग करना होगा।
सरकार ने बनाया फ्यूल सिक्योरिटी प्लान
प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि सरकार ने ‘नेशनल फ्यूल सिक्योरिटी प्लान’ लागू किया है। इस योजना का मकसद यह है कि अगर लंबे समय तक ईंधन की सप्लाई बाधित होती है, तो देश में जरूरी जरूरतों को पूरा किया जा सके।
इस योजना के तहत केंद्र और राज्यों की सरकारें मिलकर काम करेंगी और जरूरत पड़ने पर ईंधन की सप्लाई को नियंत्रित और व्यवस्थित किया जाएगा। साथ ही पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता पर लगातार नजर रखी जाएगी।
सरकार ने ईंधन पर लगने वाले टैक्स में भी राहत दी है। पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को आधा कर दिया गया है, जिससे प्रति लीटर करीब 26 सेंट की कमी आई है। यह राहत अगले तीन महीनों तक लागू रहेगी।
महंगाई से परेशान आम लोग
अल्बनीज ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया इस युद्ध का हिस्सा नहीं है, लेकिन इसके बावजूद लोगों को महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है, जिसका असर रोजमर्रा के खर्चों पर दिख रहा है।
उन्होंने माना कि किसान, ट्रक ड्राइवर, छोटे कारोबारी और आम परिवार इस समय आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। युद्ध के कारण पैदा हुए आर्थिक झटके आने वाले महीनों तक बने रह सकते हैं। सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए ईंधन की कीमत कम करने, देश में उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई मजबूत करने पर काम कर रही है।
लोगों से की ये अपील
अल्बनीज ने लोगों से अपील की कि वे जरूरत से ज्यादा ईंधन जमा न करें और सामान्य तरीके से ही पेट्रोल भरवाएं। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से दूसरों के लिए भी ईंधन उपलब्ध रहेगा।
उन्होंने सुझाव दिया कि जहां संभव हो, लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें ताकि ईंधन की बचत हो सके। इससे उन लोगों को मदद मिलेगी जिन्हें रोजमर्रा के काम के लिए वाहन चलाना जरूरी है, जैसे किसान, ट्रक ड्राइवर और स्वास्थ्यकर्मी।
सरकार का मानना है कि लोगों के सहयोग से इस संकट का बेहतर तरीके से सामना किया जा सकता है और देश को आने वाले मुश्किल समय के लिए तैयार रखा जा सकता है।






