नई दिल्ली(एजेंसी):छत्तीसगढ़ का बस्तर इलाका अपनी मनमोहक प्राकृतिक धरोहर के लिए तो मशहूर है ही, लेकिन यहां रहने वाले आदिवासी समुदायों की अनोखी परंपराएं भी लोगों को अचंभे में डाल देती हैं। बस्तर में बड़ी संख्या में जनजातियां निवास करती हैं, जिनके अपने अलग और बेहद दिलचस्प रीति-रिवाज हैं।
इस आर्टिकल में, हम आपको बस्तर के माड़िया और मुरिया जनजाति की एक ऐसी ही अनोखी परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। इस परंपरा को ‘घोटुल प्रथा’ कहा जाता है, जिसमें लड़के-लड़कियां शादी से पहले एक साथ रहते हैं। आइए जानते हैं क्या है यह प्रथा और कैसे चुनी जाती है इसमें जीवन की राह।
आखिर क्या होती है ‘घोटुल’ प्रथा?
मुख्य रूप से माड़िया और मुरिया जनजाति के आदिवासियों द्वारा निभाई जाने वाली इस प्रथा का मुख्य केंद्र ‘घोटुल’ होता है। असल में, घोटुल गांव के किनारे पर बनाई गई एक मिट्टी की झोपड़ी होती है, जहां समुदाय के लोग अपने उत्सव मनाते हैं।
इसी जगह पर गांव के युवक और युवतियों को आपस में मिलने-जुलने और एक-दूसरे को करीब से जानने का मौका दिया जाता है। यह सब कुछ किसी बुजुर्ग व्यक्ति की उचित देखरेख में होता है। दिलचस्प बात यह है कि घोटुल में शामिल होने वाली युवतियों को ‘मोतियारी’ और लड़कों को ‘छेलिक’ कहकर पुकारा जाता है।
अलग-अलग इलाकों में अलग नियम
इस परंपरा के तहत आदिवासी लड़के और लड़कियां एक साथ समय गुजारते हैं। हालांकि, अलग-अलग इलाकों में घोटुल के नियम थोड़े भिन्न हो सकते हैं। कुछ क्षेत्रों में लड़के-लड़कियां घोटुल में ही पूरा दिन बिताते हैं और रात को वहीं सोते हैं। वहीं, कुछ अन्य जगहों पर दिनभर साथ वक्त बिताने के बाद युवा रात को सोने के लिए अपने-अपने घरों की ओर लौट जाते हैं।
नाच-गाना, संस्कृति और बड़ों का मार्गदर्शन
घोटुल सिर्फ जीवनसाथी चुनने की जगह नहीं है, बल्कि यहां युवाओं को अपनी संस्कृति से भी जोड़ा जाता है। इस जगह पर समुदाय के वरिष्ठ लोग मौजूद रहते हैं, जो युवाओं को अपनी जाति से जुड़ी आस्थाओं, कला, संगीत और पुरानी कहानियों के बारे में बताते हैं।
शाम ढलते ही यहां का माहौल बेहद खुशनुमा हो जाता है। लड़के-लड़कियां गाते-गुनगुनाते हुए समूहों में घोटुल तक पहुंचते हैं। इस दौरान गांव के विवाहित पुरुष ढोल बजाते हैं और युवा इस ढोल की थाप पर जमकर नृत्य करते हैं।
समझदारी से लेते हैं शादी का फैसला
इस पूरी प्रथा का मुख्य उद्देश्य युवाओं को अपनी पसंद और समझ के अनुसार अपना जीवनसाथी चुनने का अवसर देना है। साथ समय बिताने के दौरान वे एक-दूसरे के स्वभाव को अच्छे से समझते हैं और अपने समाज व परंपराओं के बारे में जानकारी साझा करते हैं।
जब दोनों को लगता है कि उनके बीच एक मजबूत रिश्ता और अच्छी बॉन्डिंग बन गई है, तो वे बेझिझक अपने परिवार के सदस्यों को इसके बारे में बताते हैं। परिवार को जानकारी मिलने के बाद, दोनों की खुशी-खुशी शादी करा दी जाती है।






