कानपुर(एजेंसी):लखनऊ, दिल्ली, मेरठ व कानपुर के डॉक्टर टेलीग्राम ग्रुप (दो लाख तक सदस्य संख्या वाले क्लाउड-आधारित कम्युनिटी चैट रूम) पर डोनर-मरीज ढूंढकर अवैध ढंग से किडनी ट्रांसप्लांट का काला कारोबार चला रहे हैं। पुलिस ने दो अस्पतालों के संचालक समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि चार फरार हैं। इनकी तलाश में कई जिलों में छापे मारे जा रहे हैं।
आरोपित जरूरतमंदों को फंसाकर पांच से छह लाख रुपये में किडनी लेकर 60 लाख से एक करोड़ तक में बेचते हैं। इसमें सबसे ज्यादा पैसा लखनऊ के डॉ. रोहित के पास जाता था, जिसका दिल्ली-नोएडा व विदेश तक नेटवर्क है। ट्रांसप्लांट करने के लिए दिल्ली से डॉक्टर आते थे, लेकिन अस्पताल के स्टाफ को भी इसकी जानकारी नहीं होती थी।
अवैध ढंग से किडनी ट्रांसप्लांट के सनसनीखेज मामले में डोनर को तय रकम से कम मिलने पर पुलिस से शिकायत के बाद जांच में सच सामने आया। मामले में मेडलाइफ हॉस्पिटल, आहूजा अस्पताल, प्रिया अस्पताल व बंद हो चुके आरोही अस्पताल के संचालकों समेत 11 अस्पताल संलिप्त मिले हैं। इनमें 40 से 50 मरीजों की किडनी बदलने की जानकारी सामने आई है।
बीती तीन मार्च को दक्षिण अफ्रीका की महिला अर्बिका का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। नियमानुसार, किडनी ट्रांसप्लांट मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 के तहत नियंत्रित होता है। किडनी बदलने से पहले हर ट्रांसप्लांट केस को आथराइजेशन कमेटी की मंजूरी जरूरी होती है, लेकिन यहां ऐसा नहीं किया गया।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि कल्याणपुर के केशवपुरम स्थित अंबेडकरपुरम कम्युनिटी सेंटर के पास स्थित आहूजा अस्पताल में मेरठ के अल्फा हास्पिटल के डॉ. अफजल ने वहीं की महिला पारुल तोमर को किडनी की समस्या पर भर्ती कराया था। अफजल ने टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से आवास विकास निवासी एंबुलेंस चालक शिवम अग्रवाल व डॉक्टर से किडनी ट्रांसप्लांट के लिए डोनर ढूंढने को कहा।
शिवम ने मूलरूप से बिहार के समस्तीपुर व वर्तमान में उत्तराखंड के देहरादून स्थित एक इंजीनियरिंग कॉलेज में एमबीए अंतिम वर्ष के छात्र आयुष को किडनी देने के लिए छह लाख रुपये में राजी किया। मरीज का 29 मार्च की रात 11 बजे दिल्ली से आए डॉक्टरों ने आहूजा अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट किया। देर रात ढाई बजे आयुष को मेडलाइफ अस्पताल में, जबकि पारुल को आवास विकास एक स्थित प्रिया अस्पताल में भर्ती कर दिया गया।
आयुष को साढ़े तीन लाख रुपये ही मिले तो शिकायत हुई। जांच के बाद आहूजा अस्पताल के संचालक डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, उसकी पत्नी डॉ. प्रीति आहूजा, आरोही हॉस्पिटल के डॉ. राजेश कुमार, रामप्रकाश, कानपुर देहात के मूसानगर निवासी डॉ. नरेन्द्र सिंह और शिवम अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि डॉ. रोहित उर्फ राहुल, डॉ अफजल, वैभव, डॉ. अनुराग उर्फ अमित फरार हैं। आरोपितों पर धारा 18/19/20 मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम व धारा 143/3(5) मानव अंग तस्करी में मुकदमा दर्ज हुआ है। इसमें 10 साल की सजा व पांच से 20 लाख रुपये तक अर्थदंड हो सकता है।
किडनी कांड में आरोही अस्पताल प्रबंधन की भूमिका में रहा। पूर्व में मिली शिकायत पर सीएमओ ने आरोही अस्पताल को सील कराया था तो उसके संचालक डॉ. राजेश व डॉ. रामप्रकाश साझेदारी में 23 मार्च को ही मेडलाइफ हॉस्पिटल के साथ जुड़े थे। पारुल के भाई बिजनौर के धामपुर निवासी दिव्यांक चौधरी ने बताया कि बहन 2016 से किडनी की मरीज हैं, जिसका इलाज पीजीआई चंडीगढ़ व मेरठ के कई अस्पतालों में चल रहा था। बहनोई विकास तोमर स्कूल चलाते हैं।





































