घर के स्मार्ट गैजेट्स कर रहे हैं जासूसी, लीक हो रहा है आपका बेहद पर्सनल डेटा; बच्चों के AI टॉयज भी नहीं सेफ

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नई दिल्ली(एजेंसी):आपके घर में मौजूद स्मार्ट गैजेट्स प्राइवेसी लीक, हिडन बैकडोर्स और साइबर अटैक्स का जरिया बनते जा रहे हैं। इनमें इंटरनेट से कनेक्ट होने वाली (IoT) डिवाइसेज जैसे- स्मार्ट TV, वैक्यूम क्लीनर्स, Wi-Fi राउटर्स, बेबी मॉनिटर्स, डोरबेल्स, स्ट्रीमिंग डिवाइसेज और स्मार्टवॉच शामिल हैं।

वास्तव में, सेंसर्स और सॉफ्टवेयर से लैस इन डिवाइसेज का डेटा लगातार रिमोट सर्वर्स पर भेजा जा रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, लाखों स्मार्ट डिवाइसेज साइबर क्राइम के टूल बन चुके हैं।

इंटरनेशनल साइबर सिक्योरिटी ऑर्गेनाइजेशन ‘Cybernews’ ने जून में बच्चों के 10 AI टॉयज (Miko, Luna, Dash, Sphero) के एप्स की जांच की। इसमें पाया गया कि उनके द्वारा मांगी गई आधी परमिशन्स बेहद खतरनाक थीं। इन सभी एप्स ने एकदम सटीक लोकेशन का एक्सेस मांगा, 6 ने माइक्रोफोन का एक्सेस मांगा और 5 ने कैमरे का एक्सेस मांगा।

ये भी पाया गया कि Luna एप के बंद होने के बाद भी वह बैकग्राउंड में लगातार लोकेशन ट्रैक कर रहा था। सात एप्स विज्ञापनों को दिखाने के लिए यूजर्स का डेटा चुपके से ट्रैक करते हुए पाए गए। इनमें सबसे खतरनाक Miko पाया गया, जिसमें 9 परमिशन्स और 8 ट्रैकर्स मौजूद थे।

कमजोरी: इंडस्ट्रियल MQTT टेक्नोलॉजी के जरिए लीक जा रहे डेटा

रोबोट वैक्यूम क्लीनर्स में कमजोर टेक्नोलॉजी होने और मेन सर्वर का सिक्योरिटी लॉक टूटने की वजह से 7,000 घरों का लाइव कैमरा और ऑडियो फुटेज लीक हो गया।

जासूसी: सस्ते डिवाइसेज के जरिए इंटरनेट कनेक्शन का हो रहा है गलत इस्तेमाल

सस्ते गैजेट्स में मौजूद हिडन पाथ (बैकडोर) इंटरनेट का अनऑथराइज्ड एक्सेस देता है। इसके बाद हैकर्स इस कनेक्शन का इस्तेमाल दूसरे साइबर क्राइम्स को अंजाम देने के लिए करते हैं।

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