नई दिल्ली(एजेंसी):भारत अभी दुनिया की सबसे बड़ी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। पिछले दशक में देश की GDP लगभग दोगुनी हो गई है। हालांकि, पासपोर्ट की मजबूती के मामले में स्थिति कुछ हैरान करने वाली है। आर्थिक मोर्चे पर बड़ी तरक्की करने के बावजूद, भारतीय पासपोर्ट दुनिया के टॉप 50 सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट की सूची में जगह नहीं बना पाया है।
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, ग्लोबल पासपोर्ट रैंकिंग में भारत 80वें स्थान पर है। हालांकि, पिछले साल (जब यह 2025 में 85वें स्थान पर था) की तुलना में इसमें सुधार हुआ है, लेकिन आर्थिक महाशक्ति बनने की राह पर चल रहे देश के लिए यह रफ़्तार काफी धीमी मानी जा रही है।
क्या वाकई इकोनॉमी का साइज तय करता है पासपोर्ट की ताकत?
आमतौर पर यह माना जाता है कि किसी देश की अर्थव्यवस्था जितनी मजबूत होगी, उसका पासपोर्ट उतना ही शक्तिशाली होगा। हालांकि, आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद, अमेरिका इस लिस्ट में 10वें स्थान पर खिसक गया है और 35 से ज्यादा ऐसे देश हैं जिनके पासपोर्ट अमेरिका के पासपोर्ट से ज्यादा शक्तिशाली हैं।
चीन की अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी है, फिर भी यह टॉप 50 देशों में शामिल नहीं है। इसकी रैंक 59वें स्थान पर है। इसके उलट, जर्मनी, फ्रांस, इटली और जापान जैसे देश लगातार इस लिस्ट में सबसे ऊपर बने हुए हैं। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 38वें स्थान से सीधे दूसरे (2nd) स्थान पर पहुंचकर एक मिसाल कायम की है। यह साफ है कि कुल GDP और पासपोर्ट की मजबूती के बीच कोई सीधा या जरूरी संबंध नहीं है।
भारतीय पासपोर्ट होल्डर्स को कहां मिलती है ‘नो-वीजा’ एंट्री?
अभी, भारतीय पासपोर्ट रखने वालों को दुनिया भर की 56 जगहों पर बिना वीजा, वीजा-ऑन-अराइवल या ETA की सुविधा मिलती है। इसके उलट, 170 देशों में जाने के लिए भारतीयों को अभी भी पहले से पारंपरिक वीजा लेना पड़ता है। भारत को बिना वीजा एंट्री देने वाले ज्यादातर देश अफ़्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में हैं।
आखिर कैसे तय होती है किसी भी पासपोर्ट की रैंकिंग?
हेनली पासपोर्ट इंडेक्स की रैंकिंग पूरी तरह से इस बात पर आधारित है कि किसी देश के नागरिकों को यात्रा की कितनी आजादी मिलती है। खासकर, वे बिना पहले से वीज़ा लिए कितने देशों की यात्रा कर सकते हैं। यह डेटा इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) से लिया गया है। जानकारों के अनुसार, रैंकिंग तय करने में कुल GDP के बजाय कुछ बातें हैं जो नीचे दी गई हैं अहम भूमिका निभाती हैं।
- प्रति व्यक्ति आय
- माइग्रेशन रिस्क
- दस्तावेज सुरक्षा और कूटनीति
पिछले दो दशकों में कैसा रहा है भारत का इतिहास?
यदि इतिहास पर नजर डालें तो भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग पिछले 20 सालों से 70 से 90 के दायरे के बीच ही घूम रही है। वर्ष 2006 में भारत 71वें स्थान पर था। इसके बाद गिरावट आई और 2012 में 82वें तथा 2015 में यह निचले स्तर 88वें स्थान पर पहुंच गया।
2018 में स्थिति थोड़ी सुधरी और रैंक 81 हुई। साल 2024 में भारत ने अपने इतिहास का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया जब भारतीयों को 62 गंतव्यों तक आसान पहुंच मिली थी। कुल मिलाकर पिछले 10 साल में भारत को केवल 4 नए गंतव्यों का ही शुद्ध लाभ मिला है, जबकि शीर्ष देशों ने इस दौरान 10 से 20 नए देशों को अपने साथ जोड़ा है।






