कर्मचारी जनता यूनियन का प्रदेशव्यापी आंदोलन तेज
कोरबा@M4S:छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन द्वारा कर्मचारियों एवं बेरोजगार युवाओं के हित में चलाया जा रहा प्रदेशव्यापी आंदोलन अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर गया है। संगठन द्वारा अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेश के 65 मंत्रियों, सांसदों एवं विधायकों को ज्ञापन सौंपकर उनका समर्थन प्राप्त किया जा चुका है। कई जनप्रतिनिधियों ने कर्मचारियों की मांगों को न्यायोचित बताते हुए मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखकर शीघ्र समाधान की मांग की है।
जनता यूनियन द्वारा चलाए गए प्रदेशव्यापी जनप्रतिनिधि संपर्क अभियान-2026 के अंतर्गत प्रदेशभर के मंत्री, विधायक एवं सांसदों से उनके निवास व कार्यालयों में मुलाकात कर मांगपत्र सौंपा गया। साथ ही केंद्रीय स्तर के सांसदों को भी ई-मेल के माध्यम से कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों से अवगत कराया गया। संगठन की प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना की बहाली, संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण, विद्युत कंपनियों में रिक्त पदों पर तत्काल सीधी भर्ती तथा कर्मचारियों एवं उनके परिवारों के लिए बेहतर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाएं शामिल हैं। जनता यूनियन के प्रांताध्यक्ष अनिल द्विवेदी ने कहा कि प्रदेश की विद्युत व्यवस्था आज गंभीर कर्मचारी संकट से जूझ रही है। विद्युत कंपनियों में विभिन्न संवर्गों के 6000 से अधिक पद रिक्त हैं, जो कुल स्वीकृत पदों का लगभग 60 प्रतिशत है। लगातार बढ़ते कार्यभार के बीच सीमित कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है, जिसके कारण कार्यरत कर्मचारियों पर मानसिक एवं शारीरिक दबाव बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की कमी के चलते संविदा एवं ठेका कर्मियों को भी अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर जोखिमपूर्ण कार्य करना पड़ रहा है। इसके कारण दुर्घटनाओं में वृद्धि हो रही है और कई कर्मचारी असमय अपनी जान गंवा चुके हैं। इसका सीधा असर प्रदेश की विद्युत आपूर्ति और उपभोक्ता सेवाओं पर भी पड़ रहा है।
65 जनप्रतिनिधियों के बाद अब प्रबंधन को जगाने मैदान में उतरेंगे कर्मचारी
जनता यूनियन के प्रांतीय महासचिव अजय बाबर ने बताया कि जनप्रतिनिधियों तक कर्मचारियों की आवाज पहुंचाने के बाद संगठन अब आंदोलन के दूसरे चरण में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने बताया कि 5 से 12 जून तक पूरे प्रदेश में ढोल बजाओ, प्रबंधन जगाओ अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान प्रदेश के सभी क्षेत्रीय मुख्यालयों में मुख्य अभियंताओं एवं कार्यपालक निदेशकों के कार्यालयों के समक्ष कर्मचारियों द्वारा ढोल बजाकर, नारे लगाकर तथा ज्ञापन सौंपकर शीर्ष प्रबंधन का ध्यान कर्मचारियों की समस्याओं की ओर आकर्षित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्षों से लंबित नियमितीकरण, पुरानी पेंशन, रिक्त पदों पर भर्ती और चिकित्सा सुविधाओं जैसे मुद्दों पर प्रबंधन की चुप्पी अब स्वीकार्य नहीं है। यदि समय रहते मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो संगठन आगामी दिनों में आंदोलन को और व्यापक स्वरूप देने के लिए बाध्य होगा।






