Flex Fuel क्‍या है, नई तकनीक वाले ईंधन के क्‍या हैं फायदे और क्‍या हो सकते हैं नुकसान

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नई दिल्‍ली(एजेंसी):भारत में रोज करोड़ों की संख्‍या में वाहनों का उपयोग किया जाता है। जिनमें हर महीने लाखों वाहन जुड़ जाते हैं। जिससे भारी मात्रा में प्रदूषण होता है। इसे कम करने के लिए अब Flex Fuel से वाहनों को चलाने की तैयारी की जा रही है। फ्लेक्‍स फ्यूल क्‍या होता है और इससे कौन से फायदे होंगे। क्‍या इस ईंधन के नुकसान भी हो सकते हैं? हम आपको इस खबर में बता रहे हैं।

क्‍या है Flex Fuel

भारत में बीते कुछ समय से फ्लेक्‍स फ्यूल ईंधन की काफी ज्‍यादा चर्चा की जा रही है। इस ईंधन से चलने वाले वाहनों को भी जल्‍द लॉन्‍च किया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल मन में आता है कि फ्लेक्‍स फ्यूल क्‍या होता है। इसका जवाब है कि इसे फ्लेक्‍सिबल फ्यूल भी कहा जाता है जो पेट्रोल और ईथेनॉल के मिश्रण से बनाया जाता है।

क्‍या है खासियत

पेट्रोल और गन्‍ने के रस के जरिए ईथेनॉल बनाकर वाहनों को चलाया जा सकता है। साथ ही पेट्रोल में ईथेनॉल की मात्रा को भी अलग अलग स्‍तर पर मिक्‍स किया जा सकता है।

मौजूदा समय में भी मिल रहा ईथेनॉल वाला ईंधन

भारत में अभी भी सभी पेट्रोल पंंप पर 20 फीसदी ईथेनॉल के मिश्रण वाले पेट्रोल की बिक्री की जा रही है। जिसे लगातार बढ़ाने की तैयारी की जा रही है और इसे बढ़ाकर 85 से 100 फीसदी तक भी किया जा सकता है।

कौन से वाहन हो रहे लॉन्‍च

हीरो मोटोकॉर्प की ओर से फ्लेक्‍स फ्यूल के साथ तीन जून को नए वाहन लॉन्‍च किए जा रहे हैं। इसके साथ ही चार जून को मारुति की ओर से भी फ्लेक्‍स फ्यूल ईंधन की तकनीक के साथ नई गाड़ी को लॉन्‍च किया जाएगा।

क्‍या हैं फायदे
  1. फ्लेक्‍स फ्यूल ईंधन से वाहन चलाने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे देश में वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी लाई जा सकती है।
  2. फ्लेक्‍स फ्यूल का दूसरा फायदा यह होगा कि इस ईंधन के उपयोग से देश में कच्‍चे तेल की मांग कम हो जाएगी और उसे खरीदने के लिए दिए जाने वाले डॉलर की बचत की जा सकती है।
  3. किसानों को भी फ्लेक्‍स फ्यूल ईंधन से फायदा मिलेगा। क्‍योंकि यह ईंधन गन्‍ने के रस से बनाया जाता है इसलिए इसका सीधा फायदा किसानों को भी होगा।
  4. आम आदमी को भी इस ईंधन से बड़ा फायदा मिलेगा क्‍योंकि फ्लेक्‍स फ्यूल का उपयोग जब बड़े पैमाने पर किया जाएगा तो इसकी लागत भी कम हो जाएगी जिसके कारण कीमत कम हो जाएगी और पेट्रोल पर होने वाले खर्च को कम किया जा सकेगा।
क्‍या हो सकते हैं नुकसान
  1. फ्लेक्‍स फ्यूल का सबसे बड़ा नुकसान वाहन की माइलेज पर होगा। सामान्‍य पेट्रोल से चलने वाले वाहनों के मुकाबले फ्लेक्‍स फ्यूल से चलने वाले वाहनों की माइलेज 15 से 20 फीसदी तक कम हो सकती है। ऐसा इसलिए हो सकता है क्‍योंकि ईथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी पेट्रोल के मुकाबले कम होती है।
  2. इंजन की उम्र पर भी फ्लेक्‍स फ्यूल का असर हो सकता है और सामान्‍य पेट्रोल के मुकाबले इस तरह के ईंधन से चलने वाले वाहनों में पाइप, रबड़ सील जैसे हिस्‍से जल्‍दी खराब हो सकते हैं।
  3. फ्लेक्‍स फ्यूल जैसे ईंधन का तीसरा नुकसान वाहनों की कीमत पर हो सकता है। नई तकनीक का उपयोग जब वाहनों में किया जाएगा तो इससे लागत बढ़ सकती है और शुरु में इस तकनीक के साथ आने वाले वाहनों की कीमत थोड़ी ज्‍यादा हो सकती है।
  4. फ्लेक्‍स फ्यूल ईंधन की उपलब्‍धता भी शुरू में बड़ी चुनौती हो सकती है क्‍यों‍कि देश में इस तकनीक के ईंधन को उपलब्‍ध करवाने में भी कुछ महीने लग सकते हैं, जिससे वाहनों को चलाने में परेशानी हो सकती है।

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