33% खतरा अकेले भारत-चीन में! चुपके से आपकी उम्र छीन रहा है खराब कोलेस्ट्रॉल, रिपोर्ट में खुलासा

- Advertisement -

नई दिल्ली(एजेंसी):हम सभी जानते हैं कि आधुनिक जीवनशैली सेहत के लिए एक साइलेंट खतरा है, जिसपर तभी काबू पाया जा सकता है जब अपनी आदतों में सुधार किया जाए। हाल ही का अध्ययन हमें अपनी इन्हीं आदतों को सुधारने के लिए मजबूर कर रहा है क्योंकि इसके मुताबिक दुनियाभर में भारत भी उन देशों में शामिल है जहां “खराब” कोलेस्ट्राल के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

“खराब” कोलेस्ट्राल के कारण 36 लाख मौतें 

खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) मोम जैसा फैट होता है जो धमनियों में जमा होकर दिल की बीमारियों और स्ट्रोक का खतरा बढ़ाता है। बता दें कि इसका स्तर 100 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम होना चाहिए। एक अध्ययन के अनुसार, 2023 में उच्च एलडीएल या “खराब” कोलेस्ट्राल के कारण 36 लाख मौतें हुईं, जो सभी मौतों का छह प्रतिशत है और 9.07 करोड़ स्वस्थ जीवन साल खो गए, जिसमें वैश्विक एलडीएल-सी में से एक तिहाई भारत और चीन में रहा।

जनसंख्या वृद्धि और वृद्धावस्था इस बढ़ते बोझ का कारण 

अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (जेएएमए) के जर्नल में प्रकाशित नतीजों में यह बात सामने आई है कि 1990 से अब तक कुल एलडीएल कोलेस्ट्राल (एलडीएल-सी) का बोझ जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के कारण बढ़ा है और यह मध्य-सामाजिक-आर्थिक देशों की ओर बढ़ा है, जिसमें जनसंख्या वृद्धि और वृद्धावस्था इस बढ़ते बोझ का कारण बन रही है।

एलडीएल-सी बोझ बढ़ा 

शोध के सहयोगियों ने कहा कि हालांकि आयु मानक दरों में गिरावट आई है, लेकिन कुल एलडीएल-सी बोझ 1990 से बढ़ा है। जीबीडी 2023 के डाटा का उपयोग करते हुए शोधकर्ताओं ने 1990 से 2023 तक 204 देशों और क्षेत्रों में 25 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र  वयस्कों में उच्च एलडीएल-सी के कारण होने वाले बोझ का माप किया।

अध्ययन में अनुमान लगाया गया कि 1990 से 2023 के बीच 25 साल या उससे ज्यादा उम्र के वयस्कों की संख्या जिनके एलडीएल-सी स्तर 54 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर या उससे अधिक थे लगभग 2.5 अरब से बढ़कर 4.6 अरब हो गई।

2023 में एलडीएल-सी की औसत मानक आयु बुर्किना फासो, लेसोथो, सोमालिया व रवांडा में सबसे कम (80 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम) और सर्बिया, स्लोवेनिया, रूस, नार्वे व आस्ट्रिया में सबसे अधिक (135 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से अधिक) पाया गया। उच्च एलडीएल-सी भी 2023 में हृदय रोग मृत्यु दर का दूसरा प्रमुख कारण था।

Related Articles