आए दिन हो रही सडक़ दुर्घटनाओं के बाद भी परिवहन विभाग नहीं ले रहे सुध
कोरबा@M4S:सडक़ पर फर्राटे से दौड़ रही अनफिट गाडिय़ां राहगीरों के खून की प्यासी हैं। बरसात में गाडिय़ों का वाइपर काम नहीं कर रहा है। इंडिकेटर खराब है। रेडियम और नंबर प्लेट कीचड़ से ढंका रहता है। ये गाडिय़ां सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करती हैं। इसके बावजूद सडक़ पर फर्राटे से दौड़ रही है। इसपर न तो परिवहन विभाग की नजर पड़ती है, न ही ट्रैफिक पुलिस की।
जिले में आए दिन सडक़ दुर्घटनाएं हो रही है। इसमें राहगीर मालवाहक गाडिय़ों के पहिए से कुचल जान गंवा रहे हैं। भारी वाहनों से राहगीरों की मौत का सिलसिला जारी है, लेकिन सडक़ पर कार्रवाई नहीं हो रही है। सडक़ पर चलने वाली गाडिय़ों की स्थिति देखें तो इसमें कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। अधिकांश गाडिय़ों के नंबर प्लेट कीचड़ से ढंक गए हैं। वाइपर बंद पड़ा है। बरसात में गाडिय़ों के इंजन और डाले पर लगा रेडियम भी दिखाई नहीं दे रहा है। इससे सडक़ हादसे की आंशका बनी हुई है। इतना होने के बावजूद परिवहन विभाग का उडऩदस्ता कार्रवाई नहीं कर रहा है।ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई का डंडा भी उनपर नहीं चल रहा है।
ट्रांसपोर्टर नियम कायदों को ताक पर रखकर कोयला परिवहन कर रहे हैं। लोड गाडिय़ों का एक्सल उठाकर कोयला परिवहन आम हो गई है। चक्का बचाने के लिए ड्राइवर सडक़ को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसपर भी एजेंसियों ने चुप्पी साध ली है। गाडिय़ों में लगने वाली रिफ्लेक्टर को भी सरकार ने नोटिफाइड किया है। लेकिन में जिले में इसका पालन नहीं हो रहा है। घटिया रिलेटर लगाए जा रहे हैं। एक गाड़ी में नोटिफाइड रिफ्लेक्टर लगाने पर खर्च करीब 1800 से 2400 रुपए पड़ता है। जबकि कुछ वाहन मालिक करीब 300 से 500 रुपए में घटिया रिफ्लेक्टर खरीदकर वाहन में लगा देतेे हैं। कोरबा की खदानों से कोयला लेकर गाडिय़ां अलग-अलग स्थानों के लिए आना-जाना करती हैं। वर्तमान में बारिश होने के कारण कोयला खनन में गिरावट आई है और इसका असर कोयला परिवहन पर भी पड़ा है। लेकिन अभी भी सडक़ मार्ग से कोयले का परिवहन किया जा रहा है। सडक़ दुर्घटनाओं में सबसे अधिक लोग इन्हीं गाडिय़ों की चपेट में आकर मारे जा रहे हैं। इसके बाद भी परिवहन विभाग की टीम सडक़ पर उतरकर इन गाडिय़ों की जांच नहीं कर रही है। इससे वाहन मालिकों के हौसले बुलंद हैं और ड्राइवर भी नंबर प्लेट की भी साफ-सफाई करने से बच रहे हैं।
हाइवे पर आवारा मवेशी हादसों का बड़ा कारण
कोरबा जिले में बढ़ती सडक़ दुर्घटना के लिए आवारा मवेशी भी बड़ा कारण हैं। जिले से होकर गुजरने वाली बिलासपुर-अंबिकापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पाली से लेकर कटघोरा और बांगो तक आवारा मवेशियों का झुंड बैठा रहता है। कई बार यह झुंड बारिश के दिन में सडक़ पर नजर नहीं आता और छोटी-बड़ी गाडिय़ों के चालक दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। इसमें दोपहिया वाहन चालकों की जान तक चली जाती है। मवेशियों की भी जान जा रही है।





































