ये हैं दुनिया की 10 सबसे पावरफुल करेंसी, इन 4 मुस्लिम देशों का है जलवा; US डॉलर टॉप-5 से बाहर

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नई दिल्ली(एजेंसी):हाल ही में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले नए रिकॉर्ड लो लेवल तक फिसल गया, जो शुक्रवार को 94.94 के लेवल पर बंद हुआ। यानी इस समय 1 डॉलर 94.95 रुपये के बराबर है। मगर इसके बावजूद डॉलर दुनिया की सबसे पावरफुल करेंसी नहीं है। आपको ये जानकर हैरानी हो सकती है कि डॉलर दुनिया की टॉप 5 करेंसियों की लिस्ट में भी शामिल नहीं है। जी हां, आपने सही पढ़ा। आप सोच रहे हैं कि फिर किन देशों की करेंसी मजबूत हैं। आइए बताते हैं।

कुवैती दीनार नंबर 1

इस लिस्ट में कुवैती दीनार नंबर 1 पर है। इस समय 1 कुवैती दीनार 3.23 डॉलर के बराबर है। वहीं भारतीय करेंसी से तुलना करें, तो 1 कुवैती दीनार इस समय 308.47 रुपये पर है। कुवैती दीनार दुनिया की सबसे पावरफुल करेंसी है।

क्रम संख्या करेंसी कितने डॉलर कितने रुपये
1 कुवैती दीनार 3.23 308.47
2 बहरीनी दीनार 2.65 253.01
3 ओमानी रियाल 2.6 248.16
4 जॉर्डनियन दीनार 1.41 134.58
5 पाउंड स्टर्लिंग 1.34 127.14
6 केमैन द्वीप डॉलर 1.20 114.47
7 स्विस फ़्रैंक 1.11 120.01
8 यूरो 1.04 110.15
9 अमेरिकी डॉलर 1 94.95
10 बहामियन डॉलर 1 94.95

क्यों मजबूती हैं कुवैत, बहरीन और ओमान की करेंसी?

कुवैत, बहरीन और ओमान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल और प्राकृतिक गैस के निर्यात पर टिकी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का कारोबार अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए इन देशों को भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा मिलती है।
कुवैत का दीनार दुनिया की सबसे मजबूत करेंसी मानी जाती है क्योंकि कुवैत के पास विशाल तेल भंडार, बहुत कम जनसंख्या और विशाल सॉवरेन वेल्थ फंड है। बहरीन और ओमान ने भी अपनी करेंसी को लंबे समय से अमेरिकी डॉलर से फिक्स्ड एक्सचेंज रेट पर बांध रखा है।
इससे करेंसी में स्थिरता आती है और निवेशकों का भरोसा बना रहता है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो इनकी करेंसी भी अपने-आप मजबूत दिखती है।

छोटी जनसंख्या, नियंत्रित मनी सप्लाई

टॉप चारों देशों की जनसंख्या भारत या चीन जैसे देशों के मुकाबले बहुत कम है। कम जनसंख्या का मतलब है कि सरकार को प्रति व्यक्ति ज्यादा संसाधन बांटने होते हैं और करेंसी की सप्लाई को कंट्रोल करना आसान होता है। केंद्रीय बैंक नोट छापने में सख्त अनुशासन रखते हैं। ओमान और जोर्डन ने भी इसी तरह अपनी मुद्रा की कीमत ऊँची रखी और सप्लाई सीमित रखी।

स्थिर नीतियाँ और भरोसेमंद वित्तीय व्यवस्था

जोर्डन के पास कुवैत या ओमान जितना तेल नहीं है, फिर भी जोर्डनियन दीनार काफी मजबूत है। इसकी वजह है जोर्डन की सख्त मौद्रिक नीति और 1995 से डॉलर से फिक्स्ड पेग। सरकार और सेंट्रल बैंक ने महंगाई को काबू में रखा और विदेशी सहायता व निवेश से रिजर्व मजबूत बनाए रखे। बहरीन खाड़ी का बड़ा बैंकिंग हब है, इसलिए उसे वित्तीय स्थिरता बनाए रखना जरूरी था।
ओमान ने भी तेल राजस्व को बचाकर रखा और धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था को विविध बनाने की कोशिश की। कुल मिलाकर, फिक्स्ड एक्सचेंज रेट, कम जनसंख्या, तेल से आने वाला डॉलर और सख्त मौद्रिक अनुशासन इन चारों देशों की करेंसी को मजबूत बनाते हैं।

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