कोयला लदान और यात्री ट्रेनों के परिचालन में तेजी लाने की कवायद  मड़वारानी रेलवे स्टेशन में जल्द ही शुरू होगी पांचवीं लाइन

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कोरबा@M4S:मड़वारानी रेलवे स्टेशन में पांचवीं रेल लाइन का काम तेजी से चल रहा है। जल्द ही अब पांच रेल लाइन हो जाएगी, इसके लिए रेलवे ने निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। स्टेशन में दो बायपास रेल लाइन निर्माण जारी है। इसके लिए 40 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इससे कोयला लदान और यात्री ट्रेनों के परिचालन में तेजी आएगी।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर मंडल अंतर्गत कोरबा रेलखंड पर कोयला लदान का सबसे अधिक दबाव है। लेकिन मड़वारानी रेलवे स्टशेन पर रेल लाइन केवल तीन है। इसमें भी रोजाना एक दर्जन से अधिक कोयला लोड व खाली वैगन लॉगहॉल मालगाड़ी दौड़ाई जा रही है। इसकी वजह से कई बार रेड सिग्नल की वजह से मालगाड़ी को समय पर पास नहीं मिल पाता। वहीं यात्री ट्रेनों को आउटर पर खड़ी कर दी जाती है। इसके लिए रेलवे बोर्ड ने मड़वारानी रेलवे स्टेशन पर दो बायपास रेल लाइन का स्वीकृति दी है। इसकी लागत लगभग 40 करोड़ रुपए की बताई जा रही है। प्रबंधन ने रेल निर्माण का कार्य निजी कंपनी को दिया है। कंपनी ने दोनों ही रेल लाइन का काम शुरू कर दिया है। जमीन पर गिट्टी, सीमेंट का स्लीपर के सहारे कुछ क्षेत्रों में रेल लाइन बिछाने का काम जारी है। बताया जा रहा है कि इस रेल लाइन पर कोयला लोड व खाली मालगाड़ी को पास दिया जाएगा। साथ ही इसी लाइन पर मालगाड़ी खड़ी होगी। वहीं एक, दो व तीन रेल लाइन से मालगाड़ी और यात्री ट्रेनों का परिचालन सुचारू रूप से जारी रहेगा। हालांकि इसके निर्माण कार्य में अभी समय लगेगा। मड़वारानी रेलवे स्टेशन में पांच रेल लाइन होने के बाद प्लेटफार्म की संख्या भी बढ़ जाएगी। वर्तमान में प्लेटफार्म नंबर एक व दो पर ही यात्री ट्रेनों का ठहराव होता है। इसी प्लेटफार्म से यात्री ट्रेन से सफर करते हैं। रेल लाइन बढऩे के बाद तीन नंबर प्लेटफार्म भी शुरू हो जाएगा। इससे आउटर पर यात्री ट्रेनों के रूकने की समस्या कम होने की संभावना है।

कोयला लदान का दबाव अधिक
जिले की खदानों से सर्वाधिक कोयला उत्पादन होता है। कोरबा के गेवरा, दीपका, कुसमुंडा, जुनाडीह और मानिकपुर साइडिंग से कोयला लोड होकर होकर रोजाना 40 से 45 रैक मालगाड़ी निकल रही है। यह प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित बिजली कारखाना सहित अन्य कंपनियों में कोयला आपूर्ति की जाती है। इसके अलावा मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों के लिए मालगाड़ी कोयला लेकर निकलती है। इस कारण कोरबा रेलखंड पर कोयला लदान का दबाव अधिक रहता है

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