नई दिल्ली(एजेंसी):आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में तेजी से हो रही तरक्की और बड़े पैमाने पर नौकरियां जाने की बढ़ती चिंताओं के बावजूद, Goldman Sachs की एक नई रिपोर्ट का कहना है कि जल्द ही ‘AI की वजह से नौकरियों के खत्म होने’ का डर बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है, हालांकि उम्मीद है कि ये टेक्नोलॉजी आने वाले दशक में लेबर मार्केट को काफी हद तक बदल देगी।
न्यूज एजेंसी ANI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘An AI Job Apocalypse’ टाइटल वाली इस रिपोर्ट में अर्थशास्त्रियों और AI एक्सपर्ट्स के विचारों को एक साथ लाया गया है, जो इस बात पर मोटे तौर पर सहमत हैं कि जहां AI कर्मचारियों को हटाएगा, वहीं समय के साथ ये रोजगार के नए मौके भी पैदा करेगा।
Goldman Sachs के सीनियर ग्लोबल इकोनॉमिस्ट जोसेफ ब्रिग्स का अनुमान है कि 10 साल के AI ट्रांजिशन के दौरान कुल वर्कफोर्स के 9 प्रतिशत से ज्यादा, यानी अमेरिका में करीब 1.5 करोड़ कर्मचारियों की नौकरियों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, उनका मानना है कि ये परेशानी अस्थाई होगी।
ब्रिग्स ने कहा, ‘हमारे इस अनुमान के बावजूद कि AI से जुड़ी नौकरियों के नुकसान की वजह से कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा, हम ये उम्मीद बनाए हुए हैं कि लेबर मार्केट की ये मुश्किलें अस्थाई होंगी। हमारी इस सोच के पीछे मुख्य वजह यह है कि लंबे समय में AI मौजूदा नौकरियों को खत्म करने के साथ-साथ कई नई नौकरियां भी पैदा करेगा।’
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के प्रोफेसर और इकोनॉमिक्स में नोबेल पुरस्कार विजेता Daron Acemoglu को उम्मीद है कि अगले पांच सालों में रोजगार पर AI का केवल मामूली नेगेटिव असर ही दिखेगा। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि लंबे समय का आउटकम इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां AI का इस्तेमाल कर्मचारियों को हटाने के बजाय उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए कैसे करती हैं।
Acemoglu ने कहा, ‘आने वाले समय में AI के नौकरियों को बढ़ाने के बजाय उनकी जगह लेने की संभावना ज्यादा है… इसलिए, मुझे उम्मीद है कि आने वाले सालों में नौकरियों की संख्या पर कुल मिलाकर बुरा असर पड़ेगा। लेकिन नौकरियां जाने का पैमाना उतना बड़ा नहीं होगा, जितनी बड़े पैमाने पर छंटनी की भविष्यवाणी कुछ लोग कर रहे हैं।’
उन्होंने आगे जोड़ा कि अगर AI इन्वेस्टमेंट मुख्य रूप से कर्मचारियों को बदलने पर ही फोकस करता रहा, तो अगले दशक में नौकरियों का नुकसान और ज्यादा गहरा हो सकता है।
MIT के कंप्यूटर साइंस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लेबोरेटरी में ‘फ्यूचरटेक’ रिसर्च प्रोजेक्ट के डायरेक्टर Neil Thompson ने कहा कि सिर्फ AI की टेक्निकल कैपेबिलिटी ही बड़े पैमाने पर नौकरियां जाने की गारंटी नहीं देती है।
थॉम्पसन ने कहा, ‘लेबर मार्केट पर AI का जो अंतिम असर होगा, वह उतना बड़ा नहीं हो सकता है जितना कि इसकी इंप्रेसिव कैपेबिलिटीज संकेत देती हैं।’ उन्होंने नोट किया कि रिलायबिलिटी, एक्सेस टू डेटा, कॉस्ट और प्रैक्टिकल डिप्लॉयमेंट अभी भी इसे अपनाने में बड़ी बाधाएं हैं।
AI के संभावित असर को बताते हुए थॉम्पसन ने कहा कि इस टेक्नोलॉजी को ‘एक ढहती हुई लहर’ के बजाय ‘एक चढ़ते हुए ज्वार’ के तौर देखा जाना चाहिए, जो बिजनेस और कर्मचारियों को खुद को ढालने का पूरा समय देता है।
रिपोर्ट में ये भी पाया गया है कि अलग-अलग पेशों में AI का असर फिलहाल असमान है। Goldman Sachs की इकोनॉमिस्ट Elsie Peng ने कहा कि AI कुछ पेशों में कर्मचारियों की जगह ले रहा है तो वहीं दूसरी तरफ कुछ दूसरे पेशों में प्रोडक्टिविटी बढ़ा रहा है।
पेंग ने कहा, ‘प्रैक्टिस में, हमने पाया है कि AI ऑग्मेंटेशन ने नौकरियां पैदा की हैं, लेकिन इतनी नहीं कि वे AI रिप्लेसमेंट से होने वाले नौकरियों के नुकसान की पूरी भरपाई कर सकें, जिसके परिणामस्वरूप लेबर मार्केट पर थोड़ा नेगेटिव असर दिख रहा है।’
रिपोर्ट में नोट किया गया है कि युवा और कम अनुभवी कर्मचारियों को आने वाले समय में ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, खासकर AI के प्रभाव वाले व्हाइट-कॉलर प्रोफेशन्स में। हालांकि, Goldman Sachs के इकोनॉमिस्ट Jessica Rindels और Pierfrancesco Mei का कहना है कि अब तक ऐसे बहुत कम सबूत हैं जिनसे पता चले कि AI ने हाल ही में कॉलेज से ग्रेजुएट हुए लोगों के रोजगार के मौकों को काफी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन दूसरे कई कर्मचारियों की तुलना में भविष्य में आने वाले बदलावों से उन पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना बनी हुई है।
कुल मिलाकर, रिपोर्ट नोट करती है कि जहां AI से वर्कप्लेस बदलने और प्रोडक्टिविटी ग्रोथ तेज होने की उम्मीद है, वहीं पुराना इतिहास बताता है कि लेबर मार्केट अक्सर नए पेशों को बनाकर खुद को एडजस्ट कर लेते हैं, बशर्ते इस टेक्नोलॉजिकल प्रोग्रेस के साथ-साथ ह्यूमन स्किल में इन्वेस्टमेंट और नए रोजगार पैदा करने की कोशिशें की जाएं।






