छत्तीसगढ़ सरकार की मत्स्य नीति के खिलाफ आदिवासी मछुआरों ने ज्ञापन सौंपा

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किसान सभा ने बांगो डेम से प्रभावितों को मछली पालन का अधिकार देने की मांग की नहीं तो सड़क की लड़ाई की दी चेतावनी

कोरबा@M4S:बुका जल विहार में आदिवासी मछुआरा संघ (हसदेव जलाशय) कोरबा के बैनर तले फिरतू बिंझवार के नेतृत्व में पोढ़ी उपरोडा ब्लॉक के बांगो बांध परियोजना में स्थानीय आदिवासी विस्थापितों ने पोड़ी एसडीएम कार्यालय में एकत्रित होकर तहसीलदार के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर हसदेव जलाशय में मत्स्य पालन हेतु जारी निविदा को रद्द करने की मांग की छत्तीसगढ़ किसान सभा ने बांगो डेम से प्रभावित विस्थापितों की मांगों का समर्थन करते हुए मत्स्य पालन हेतु जारी टेंडर को रद्द करने के साथ बांगो डेम से प्रभावितों को मछली पकड़ने का अधिकार देने की मांग की।

छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि हसदेव नदी पर बाँगो बांध का निर्माण किया गया जिसमे 58 आदिवासी बाहुल्य गाँव पूर्णतः डूब गए। उसके पश्चात विस्थापितों को मुआवजा तथा पुनर्वास देने में सरकार की गंभीर विसंगतिया सामने आई । तत्कालीन कलेक्टर ने विस्थापितों को आश्वासित किया था कि डूब क्षेत्र में सभी विस्थापित परिवार मछली पालन कर अपना जीवन यापन कर सकेंगे और इस क्षेत्र में कई मछुआरा सहकारी समितियों का गठन भी किया गया । गठन पश्चात विस्थापित परिवार रॉयल्टी के आधार पर 4-5 साल तक मत्स्य पालन किया लेकिन उसके बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने बांगो बांध को ठेके पर देने का निर्णय लिया जिससे सीधे तौर पर मछली पालन हेतु बांध पर नियंत्रण निजी ठेकेदारों के पास चला गया और स्थानीय विस्थापित आदिवासी अपने ही जमीन और जल पर निजी ठेकेदारों के द्वारा मजदूर बना दिए गए पूरे जिले में विस्थापितों का दर्द एक ही है सरकार की नीतियों के करान ही जमीन के असली मालिक को उनको अपने ही जमीन पर सरकार सीधे मजदूर बना दे रही है और लगातार विस्थापन के शिकार किसानों की स्तिथि लगातार गंभीर बनती जा रही है। अगर सरकार आदिवासी मछुआरों की मांगे नहीं मानेगी तो सड़कों पर उतर कर आंदोलन को तेज करने की घोसना किसान सभा ने की।

आदिवासी मछुआरा संघ (हसदेव जलाशय) के फिरतू बिंझवार ने कहा की 2003 और वर्तमान 2022 की मत्स्य नीति में इसी व्यवस्था को जारी रखते हुए एक हज़ार हेक्टेयर के बड़े जलाशय को मत्स्य महासंघ जो की मत्स्य विभाग का की अंग है बांध को ठेके पर देने का अधिकार दे दिया । इस प्रकार से पिछले तीन दशक से मत्स्य महासंघ जलाशय को10 वर्षों को लीज पर देता आ रहा है । जिसका आदिवासी मछुआरा संघ विरोध करता है।
आदिवासी मछुआरा संघ ने बताया की 2015 में दिया गया ठेका जून 2025 में समाप्त हुआ जो की निजी ठेकेदार को दिया गया था। ठेका प्रथा के विरोध के बावजूद मत्स्य महासंघ ने सरकार की मत्स्य नीति 2022 का हवाला देते हुए पुनः10 वर्षों की लीज हेतु निविदा जारी कर दिया है जिसकी अंतिम तिथि 8 अक्टूबर 2025 है और अगले 10 वर्षों के लिए बांगो बांध का ठेका निजी ठेकेदार को देने की तैयारी है । मछुआरों ने यह तय किया है कि वह ठेकेदार के लिए काम नहीं करेंगे और मत्स्य नीति में संशोधन के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे जिसके अंतर्गत मछली पालन रॉयल्टी आधार पर करने की मांग की। किसान सभा ने कहा कि सरकार टेंडर निरस्त नहीं करेगी तो मछुआरों को एकजुट कर मछली पकड़ने का अभियान चलाया जाएगा।

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