मिट्टी,रंग,सजावटी सामग्री और मजदूरी की लागत बढ़ने का असर
कोरबा@M4S:गणेश उत्सव में अभी समय है, लेकिन प्रतिमाओं को आकार देने का काम शुरू हो गया है। शहर के साथ – साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी मूर्तिकार गणेश प्रतिमा तैयार करने में जुट जुट गए हैं। इस बार मिट्टी,रंग,सजावटी सामग्री और मजदूरी की लागत बढ़ने का असर प्रतिमाओं की कीमत पर पड़ेगी। मूर्तिकारों के अनुसार अलग-अलग आकार और सजावट के आधार पर गणेश प्रतिमाओं के दाम में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं कुछ बड़ी और विशेष रूप से सजाई जाने वाली प्रतिमाओं की बुकिंग के लिए 30 प्रतिशत तक एडवांस लिया जा रहा है। गणेश उत्सव को लेकर शहर में अभी से उत्साह नजर आने लगा है। कई समितियां इस बार प्रतिमा का आकार, रूप और सजावट तय करने के लिए मूर्तिकारों से संपर्क कर रही हैं। समय पर प्रतिमा तैयार हो सके, इसके लिए पसंद की डिजाइन वाली प्रतिमाओं की बुकिंग भी पहले से की जा रही है। मूर्तिकारों का कहना है कि प्रतिमा तैयार करने में केवल मिट्टी ही नहीं, बल्कि बांस, रस्सी, कपड़ा, रंग, पेंट, सजावटी सामान और अन्य सामग्री की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा प्रतिमा तैयार करने वाले कारीगरों की मजदूरी भी बढ़ी है। इन सभी खर्चों का सीधा असर मूर्तियों की लागत पर पड़ रहा है। पहले सामान्य आकार की प्रतिमाओं पर जहां सीमित खर्च में काम हो जाता था, वहीं अब आकर्षक डिजाइन, बेहतर रंग और विशेष सजावट के कारण लागत लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि इस बार ग्राहकों को पिछले वर्ष की तुलना में अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
25 से ज्यादा मूर्तिकार तैयारी में जुटे
शहर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 25 से अधिक मूर्तिकार गणेश प्रतिमाएं तैयार करने में जुटे हैं। कुछ मूर्तिकारों ने बड़े आकार की प्रतिमाओं पर काम शुरू कर दिया है, जबकि कई छोटे और मध्यम आकार की प्रतिमाओं को तैयार करने में लगे हैं। प्रतिमा को पूरी तरह तैयार करने में कई दिन लगते हैं, इसलिए मूर्तिकारों के लिए पहले से काम शुरू करना जरूरी हो जाता है। गणेश उत्सव समितियां इस बार समय से पहले प्रतिमा बुक कराने में रुचि दिखा रही हैं। खासकर बड़ी प्रतिमाओं के लिए मूर्तिकारों के पास पहले ही ऑर्डर पहुंचने लगे हैं। कुछ समितियां अपनी पसंद के डिजाइन और आकार के अनुसार प्रतिमा तैयार करा रही हैं। बड़ी प्रतिमाओं में विशेष सजावट और आकर्षक रंगों की मांग अधिक रहती है।
मिट्टी की प्रतिमाओं को प्राथमिकता
इस बार मिट्टी से बनी प्रतिमाओं को लेकर भी जागरूकता बढ़ी है। प्लास्टर ऑफ पेरिस की जगह मिट्टी की प्रतिमाओं को प्राथमिकता देने की अपील की जाती रही है। मूर्तिकार भी ऐसी प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं, जिनका विसर्जन अपेक्षाकृत पर्यावरण के अनुकूल तरीके से किया जा सके। हालांकि आकर्षक सजावट के साथ पर्यावरणीय मानकों का पालन करना भी चुनौती बना हुआ है। मूर्तिकारों के अनुसार प्रतिमा तैयार करते समय अब समितियां विसर्जन व्यवस्था को भी ध्यान में रखने लगी हैं। बड़ी प्रतिमाओं के लिए परिवहन और विसर्जन की व्यवस्था अलग से करनी पड़ती है। ऐसे में कई समितियां प्रतिमा का आकार तय करते समय अपनी सुविधा और उपलब्ध संसाधनों का भी ध्यान रख रही








