कठपुतलियों से गढ़ रहे भविष्य,पपेट शो बना शिक्षा का सशक्त माध्यम

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शिक्षक दिवस विशेष: पाली ब्लॉक के नवाचारी शिक्षक संतोष कर्ष की अनोखी पहल से वनांचल के बच्चों में लौटी सीखने की ललक

पाली@M4S:शिक्षक दिवस पर जब हम एक आदर्श शिक्षक की कल्पना करते हैं, तो पाली विकासखंड के अंतिम छोर पर बसे ग्राम कारीछापर के शासकीय प्राथमिक शाला के नवाचारी शिक्षक संतोष कर्ष का नाम सामने आता है। शिक्षा में नवाचार से वनों में बसे इस सरकारी स्कूल की सीरत और सूरत दोनों बदल दी गई है।

शाला में पदस्थापना के बाद शिक्षक संतोष कर्ष ने शाला को आकर्षक व स्मार्ट बनाने के साथ-साथ पढ़ाई को बोझ नहीं, खेल बना दिया। शाला त्यागी बच्चों का पुनः प्रवेश, समुदाय की मदद से जरूरतमंद बच्चों को शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराना, कबाड़ से जुगाड़, बाल कैबिनेट, मुस्कान पुस्तकालय जैसे 50 से अधिक नवाचार उन्होंने किए हैं।

पपेट शो बना बच्चों का सबसे प्रिय नवाचार

इन सभी नवाचारों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय और प्रभावी है उनका पपेट शो और पुतली कला के माध्यम से शिक्षण। श्री कर्ष वर्णमाला, गिनती, नशा मुक्ति, स्वच्छता, नैतिक शिक्षा जैसे कठिन विषयों को कठपुतलियों के संवाद, कहानी और मैजिक शो के माध्यम से इतने रोचक ढंग से पढ़ाते हैं कि बच्चे खेल-खेल में ही सब याद कर लेते हैं।

उनका यह पपेट शो अब केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसपास के स्कूलों और ग्राम सभाओं में भी जन-जागरूकता का माध्यम बन गया है। बच्चे कठपुतली को अपना दोस्त मानते हैं और उसी दोस्त से सीखते हैं। यही कारण है कि शाला में बच्चों की नियमित उपस्थिति 90% से अधिक हो गई है।

इस उत्कृष्ट कार्य के लिए समग्र शिक्षा रायपुर द्वारा इन्हें ‘पढ़ई तुहर द्वार’ पोर्टल में ‘आज का नायक’ सम्मान मिल चुका है। विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट कार्यों के लिए इन्हें 200 से अधिक प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुके हैं। विभाग इन्हें राज्य और देश स्तर के शैक्षिक प्रशिक्षण में बतौर मास्टर ट्रेनर आमंत्रित करता है।

सच ही कहा गया है,एक शिक्षक केवल किताब नहीं पढ़ाता, वह भविष्य गढ़ता है। संतोष कर्ष जैसे शिक्षक इसका जीवंत प्रमाण हैं। उनके इस नवाचार से गांव की नागरिक खुश रहते हैं और विद्यालय की प्रधान पाठक श्रीमती पूजा जायसवाल ने भी उनके कार्यों की खुले मन से प्रशंसा की है

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