कोरबा@M4S:जिले के जंगल में लकड़ी तस्कर सक्रिय हैं,जिन्होंने पड़ोसी जिलों के तस्करों से हाथ मिला लिया है। उनकी मदद से लकड़ी को अन्यत्र खपाया जा रहा है। एक बार फिर तस्करों ने बडे पैमाने पर हरे भरे पेड़ों की कटाई कर दी। विडंबना तो यह है कि कई दिनों से चल रहे पेड़ कटाई की भनक तक वन अमले को नही लगी। ग्रामीणों ने संदेह होने पर तहकीकात शुरू की तो मामला उजागर हुआ, तब कहीं जाकर वन विभाग की टीम हरकत में आई। टीम ने सेमल प्रजाति की लकड़ी सहित ट्रैक्टर व मिनी मेटाडोर के अलावा पेड़ कटाई में प्रयुक्त इलेक्ट्रिक उपकरण जप्त किए हैं।मामले में अवैध लोडिंग व परिवहन का प्रकरण दर्ज कर जांच की जा रही है।मामला कोरबा वनमंडल के लेमरू वन परिक्षेत्र का है।बताया जा रहा है कि लामपहाड़ बड़गांव के कक्ष क्रमांक पी 862 में करीब पखवाड़े भर से इलेक्ट्रिक उपकरण से पेड़ों की कटाई चल रही थी। जंगल से काटे गए पेड़ को ढुलाई कर अन्यत्र ले जाया जा रहा था। पहले तो ग्रामीण वन विभाग द्वारा पेड़ कटाई का काम किए जाने की बात सोच रहे थे, लेकिन गड़बड़ी की आशंका तब हुई,जब ग्रामीणों बारात जाना था। वे लामपहाड़ के रास्ते बोलरो में बारात जाने की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच किसी ने ग्रामीणों को जानकारी दी कि लाम पहाड़ मार्ग लगातार ट्रैक्टर से लकड़ी ढुलाई के कारण खराब हो चुका है। मार्ग में बाइक व ट्रैक्टर सहित अन्य वाहन खड़े हैं। यह जानकारी होते ही ग्रामीण मौके पर जा पहुंचे। ग्रामीणों ने तह तक जाने की कोशिश की तो पेड़ कटाई में गांव के ही राजू नामक एक युवक का नाम सामने आया। पूछताछ करने पर उसने लकड़ी को रायपुर ले जाने की जानकारी दी। उसने पेड़ कटाई के लिए किसी तरह की अनुमति की जरूरत नहीं होने की बात कहीं। उसने सरपंच से अनुमति लेने का दावा किया। जब ग्रामीणों ने सरपंच से जानकारी ली तो उसने ऐसी कोई भी अनुमति से अनभिज्ञता जाहिर कर दी।

आखिरकार पूरा मामला संदेहास्पद होने पर ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी। तब कहीं जाकर वन अफसर हरकत में आए। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंची। टीम सेमर प्रजाति की लकड़ी के अलावा ट्रैक्टर व जांजगीर चांपा पासिंग टाटा 1916 वाहन क्रमांक सीजी 11 बीएन 8798 को जप्त कर वन परिक्षेत्र कार्यालय ले आई। मामले में अवैध लोडिंग व परिवहन का प्रकरण तैयार कर जांच की जा रही है। इस पूरे मामले में चौंकाने वाली बात तो यह है कि वन विभाग द्वारा अवैध लोडिंग व परिवहन की कार्रवाई की गई है। इसके पीछे कुछ अलग ही तर्क दिया जा रहा है। कहा जा रहा है कि जिस स्थान पर पेड़ की कटाई की गई है, वह जमीन राजस्व की है या फिर वन विभाग की जांच की जाएगी। यदि राजस्व विभाग की जमीन हुई तो प्रकरण तैयार कर एसडीएम कोर्ट में पेश किया जाएगा। यदि नियमों की बात करें तो पेड़ कटाई के लिए अनुमति लेने वन व राजस्व विभाग में आवेदन लगाए जाते हैं, जबकि वन विभाग को कोई आवेदन प्राप्त नही होने की बातें कही जा रही है।
जंगल की सुरक्षा पर उठे सवाल
जिले में लगातार लकड़ी तस्करी के मामले सामने आ रहे हैं। वन अफसर जंगल में पेड़ों व वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सतत गश्त के दावे करते हैं, लेकिन तमाम दावे थोथे ही हैं। जमीनी हकीकत तो यह है कि जंगल की सुरक्षा के बजाय गैर विभागीय काम पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। दुरस्थ इलाके में वनकर्मियों के गायब रहने की बातें सामने आती है। इस मामले में भी बीटगार्डो की कार्यशैली पर ग्रामीणों ने सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पखवाड़े भर से पेड़ की कटाई व ढुलाई चल रही थी, बावजूद बीट गार्डों को इसकी भनक तक नही लगी।






