BIHAR ELECTION: सीटों पर नहीं बनी बात, महागठबंधन में सहनी संकट गहराया

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पटना(एजेंसी):बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Election 2025) के पहले चरण के नामांकन की उल्टी गिनती के बीच विकासशील इंसान पार्टी प्रमुख मुकेश सहनी (Mukesh Sahani) के बागी तेवर अब खुलकर सामने आ गए हैं। सीट बंटवारे को लेकर नाराज सहनी लगातार अपने सख्त रुख पर कायम हैं और झुकने के मूड में नहीं दिख रहे।

उनकी नाराजगी इतनी बढ़ गई कि कांग्रेस नेतृत्व को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा। यहां तक की राहुल गांधी तक ने सहनी से फोन पर बात कर मामला सुलझाने की कोशिश की, लेकिन फिलहाल कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका है।

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए तमाम दलों के उम्मीदवार नामांकन में जुटे हैं। राजद, कांग्रेस और वामदलों तक ने अपने उम्मीदवारों को सिंबल देकर नामांकन की हरी झंडी भी दे दी है, लेकिन महागठबंधन के प्रमुख सहयोगी वीआईपी की नाव अब तक मंझधार में फंसी हैं।

वीआईपी को कितनी सीटें मिलेंगी, उनके उम्मीदवार कहां से लड़ेंगे यह तस्वीर साफ नहीं। अब जबकि पहले चरण के नामांकन के महज कुछ घंटे बचे हैं तो सहनी के सब्र का बांध टूट पड़ा।

लगातार इंतजार के बाद आखिरकार सहनी ने गुरुवार को आनन-फानन में पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुला ली। सहनी के मात्र प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाने से महागठबंधन खेमे में हड़कंप मच गया। इसके बाद पटना से लेकर दिल्ली तक से सहनी को मनाने का सिलसिला शुरू हुआ।

आलम यह रहा कि सहनी की 12 बजे होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस दिन भर में तीन बार टली और अंतत रद हो गई। सूत्रों ने बताया कि सहनी को अंतिम समय में 15 सीटें दिए जाने की बात सामने आई। हालांकि, ये सीटें कौन होंगी, 15 ही होगी या फिर इससे कम या ज्यादा इस पर किसी भी सहयोगी दल की ओर से कोई आश्वासन नहीं मिला।

वीआईपी नेता सुनील कुमार ने कहा कि पार्टी प्रमुख को राहुल गांधी का फोन आया है। बात बढ़ी है। उम्मीद है सब बेहतर ही होगा। परंतु रात नौ बजे तक मामला फंसा हुआ ही नजर आया।

फिलहाल यह खबर सामने आ रही है कि राहुल गांधी के बुलावे पर राजद नेतृत्व ने अपने राज्यसभा सदस्य और तेजस्वी के करीबी संजय यादव को राहुल गांधी के बुलावे पर दिल्ली भेजा है। संजय यादव दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात कर सहनी के लिए रास्ता निकालेंगे।

इधर, सहनी की पार्टी ने साफ कर दिया है कि पार्टी का जनाधार कई इलाकों में मजबूत है। बावजूद अगर विकासशील इंसान पार्टी को सम्मानजनक हिस्सेदारी नहीं मिली तो पार्टी अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरने से पीछे नहीं हटेगी।

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