एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के भू-विस्थापितों का बढ़ा आक्रोश मुआवजे और रोजगार की मांग को लेकर 28 अप्रैल से अनिश्चितकालीन धरना की चेतावनी

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कोरबा@M4S:एसईसीएल गेवरा परियोजना से प्रभावित ग्राम रलिया, मनगांव, लक्ष्मण नगर और नरईबोध के ग्रामीणों ने प्रशासन और प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को कलेक्टर, विधायक और एसईसीएल महाप्रबंधक को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने अपनी गंभीर समस्याओं को साझा करते हुए चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो 28 अप्रैल से वे गेवरा कार्यालय के समक्ष उग्र और अनिश्चितकालीन प्रदर्शन करेंगे ।
ग्रामीणों की मांग है कि ग्राम रलिया के बहादुर केंवट का मकान तोड़े हुए एक माह बीत चुका है, लेकिन आज तक मुआवजा राशि खाते में जमा नहीं की गई है। इसी प्रकार मनगांव लक्ष्मण नगर के विस्थापितों की दोबारा अधिग्रहित की गई भूमि का मुआवजा भी अटका हुआ है। प्रभावित परिवारों को न तो स्थाई रोजगार दिया जा रहा है और न ही वैकल्पिक रोजगार की कोई व्यवस्था की गई है भूमि संबंधी अन्य प्रकरण भी वर्षों से लंबित हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण धरने के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है। साथ ही नरईबोध के पार्षद पति राकेश पटेल पर आरोप लगाया गया है कि वे प्रभावित ग्रामीणों की पीएनसी कंपनी में ज्वाइनिंग को अवैध रूप से रुकवा रहे हैं।ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने अपनी जमीन एसईसीएल को दी है किसी स्थानीय प्रतिनिधि को नहीं अत: प्रबंधन और प्रशासन सीधे विस्थापितों से संवाद करे। ज्ञापन में मांग की गई है अगले 7 दिनों के भीतर सभी लंबित मुआवजा राशि और रोजगार की प्रक्रिया पूर्ण की जाए धरना स्थल और आने-जाने वाले मार्ग पर पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए। प्रभावित महिला गोमती केवट ने कहा कि हम अपनी जायज मांगों के लिए सालों से भटक रहे हैं यदि शासन-प्रशासन सात दिनों में ठोस कार्यवाही नहीं करता तो 28 अप्रैल से होने वाले अनिश्चितकालीन आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की होगी।

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