रायपुर(एजेंसी):छत्तीसगढ़ के दक्षिण-पश्चिम बस्तर के जंगलों में जमीन की गहराइयों से मिली एक चट्टान का टुकड़ा करीब 3.65 अरब साल पुराना पाया गया है, जो अब हमारे पूरे भारत की सबसे पुरानी चट्टान बन चुकी है।
यह टुकड़ा रहस्यमयी दौर का एक बेहद दुर्लभ गवाह है, जब हमारी पृथ्वी ठंडी होकर अपनी पहली ऊपरी परत बना ही रही थी। इस एक अनोखी खोज ने भारत के भूवैज्ञानिक इतिहास की उम्र को झटके में 15 करोड़ साल और पीछे धकेल दिया है।
यह महत्वपूर्ण खोज भोपालपटनम-बीजापुर कॉरिडोर के किनारे सामने आई है। यहां एक क्रेटन यानी महाद्वीपीय क्रस्ट का एक प्राचीन टुकड़ा स्थित है, जो सदियों के टकराव, दबने और पिघलने के बावजूद सुरक्षित बच गया है।
यह अध्ययन भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) भोपाल के प्रोफेसर प्रीतम नासीपुरी और कौशिक सत्पथी द्वारा किया गया है। इसमें कोरिया बेसिक साइंस इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर कीवुक यी और आईआईटी खड़गपुर के पूर्व प्रोफेसर अभिजीत भट्टाचार्य ने भी अपना सहयोग दिया है।
चट्टान की प्राचीन इतिहास
प्रोफेसर नासीपुरी ने कहा किइसकी धारियां इसके लंबे और जटिल भूवैज्ञानिक इतिहास को दर्शाती हैं। यह सतह से शायद 30 से 50 किमी नीचे, क्रस्ट की गहराई में गर्म होकर और आंशिक रूप से पिघल कर बनी थी।
वहां का तापमान संभवतः 1,000 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक रहा होगा। उन्होंने आगे बताया कि बस्तर के ये उदाहरण, जो 3.64 से 3.60 अरब साल पुराने हैं, दुनिया में कहीं भी ज्ञात सबसे पुराने मैग्मैटिक चार्नोकाइट्स हो सकते हैं।
प्रारंभिक पृथ्वी के भूविज्ञान पर गहरा प्रभाव
चट्टान से प्राप्त रासायनिक और आइसोटोपिक साक्ष्य बताते हैं कि सबडक्शन से संबंधित प्रक्रियाएं शायद 3.6 अरब साल पहले से ही पृथ्वी पर सक्रिय थीं, जो कि आधुनिक प्लेट विवर्तनिकी का एक शुरुआती रूप है।
अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि यह साक्ष्य देश की चट्टानों की प्राचीनता को उस अवधि तक ले जाता है जिसकी कल्पना करना भी इंसानों के लिए मुश्किल है, और यह शुरुआती पृथ्वी के भूविज्ञान से जुड़े कई तर्कों को पूरी तरह से बदल सकता है।





















































