नई दिल्ली(एजेंसी):राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद नरेंद्र मोदी कैबिनैट में जल्द ही बड़े बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं।
दो मंत्रियों की राज्यसभा की सदस्यता खत्म होने और दो मंत्रियों के प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के साथ ही तृणमूल कांग्रेस से टूटकर एनसीपीआई में शामिल हुए 20 सांसदों के राजग में सबसे बड़े गुट के रूप में शामिल होने से कैबिनेट में व्यापक विस्तार की संभावना बताई जा रही है। इसके अलावा शिव सेना (यूटीबी) के छह सांसदों के शामिल होने के बाद कैबिनेट में शिंदे गुट का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकता है।
जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू के राज्यसभा का कार्यकाल खत्म
दरअसल, जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू के राज्यसभा का कार्यकाल 21 जून को खत्म हो गया। इसे देखते हुए कुरियन ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया और राष्ट्रपति ने उसे स्वीकार भी कर लिया।
वहीं रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा अभी नहीं हुआ। इसी तरह से मंत्रिमंडल में शामिल पंकज चौधरी को उत्तरप्रदेश और हर्ष मलहोत्रा को दिल्ली का पार्टी प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया है। उनकी जगह नए चेहरों को जगह मिलने की चर्चा है।
नए चेहरों को मिल सकती है कैबिनेट में जगह
मंत्रियों के राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में नए राजनीतिक समीकरणों के साथ ही भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम कभी भी घोषित हो सकती है। राष्ट्रीय अध्यक्ष 45 वर्षीय नितिन नवीन की टीम में नए चेहरों को ज्यादा तरजीह देने की बात भी चल रही है। ऐसे में संगठन में मौजूदा कुछ चेहरो को कैबिनेट में जगह मिल सकती है।
मोदी कैबिनेट में होगा आखिरी बड़ा बदलाव
सूत्रों का मानना है कि कैबिनेट में यह आखिरी बड़ा बदलाव होगा और प्रधानमंत्री मोदी इसी के साथ 2029 के चुनाव तक चलेंगे। पिछली सरकार में भी लगभग मध्यावधि में ही फेरबदल में 12 मंत्रियों को हटाया था, आधा दर्जन के आसपास मंत्रियों को पदोन्नत किया था और लगभग ढ़ाई दर्जन नए चेहरे शामिल किए थे।
गौरतलब है कि केंद्रीय कैबिनेट में कुल 81 मंत्री हो सकते हैं। फिलहाल प्रधानमंत्री को शामिल करते हुए 71 मंत्री हैं। ऐसे में दस की तो वैकेंसी तो पहले से ही है।






