‘हम मजबूरी में लड़ रहे युद्ध’, रूस में फंसे 26 भारतीयों का मामला पहुंचा SC; केंद्र से मांगा जवाब

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नई दिल्ली(एजेंसी):रूस में फंसे 26 भारतीय नागरिकों को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। आरोप है कि इन्हें नौकरी का झांसा देकर रूस ले जाया गया और वहां जबरन यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में शामिल कर दिया गया। अब कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मामले पर जवाब मांगा है।

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत कर रहे थे, ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने सरकार से एक हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा है। परिवारों की ओर से पेश वकीलों ने कोर्ट को बताया कि फंसे हुए लोगों ने संदेश भेजकर कहा है कि वे रूस में हैं और अपनी मर्जी के खिलाफ युद्ध लड़ने को मजबूर हैं।

इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और समय मांगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह पहले भी सरकार से इस मुद्दे को देखने के लिए कह चुका है।

नौकरी का झांसा, फिर जबरन भर्ती का आरोप

याचिका में कहा गया है कि ये 26 भारतीय वैध वीजा पर रूस गए थे। कुछ पर्यटक के रूप में और कुछ छात्र बनकर वहां पहुंचे थे। लेकिन वहां पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट छीन लिए गए, उनकी आवाजाही पर रोक लगा दी गई और उन्हें रूसी सेना से जुड़े सैन्य इकाइयों में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया। परिवारों का कहना है कि उनके साथ धोखा हुआ और उन्हें झूठे वादों के जरिए फंसाया गया।

परिवारों के मुताबिक, सितंबर से अक्टूबर 2025 के बीच मिले आखिरी संदेशों से पता चला कि ये लोग युद्ध वाले इलाकों जैसे कुपियांस्क, सेलिदोवे, माकीवका और चेल्याबिंस्क के आसपास थे। इन संदेशों में उन्होंने डर जताया था और कहा था कि वे वहां से निकल नहीं पा रहे हैं। कई मामलों में इसके बाद से उनका संपर्क पूरी तरह टूट गया है। परिवारों को अब यह भी नहीं पता कि उनके अपने किस हालत में हैं और कहां हैं।

सरकार से मदद की गुहार

याचिका में कहा गया है कि परिवारों ने विदेश मंत्रालय, मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास, गृह मंत्रालय और राज्य सरकारों से कई बार मदद मांगी, लेकिन उन्हें स्पष्ट जानकारी या ठोस सहायता नहीं मिली। संविधान के अनुच्छेद 32 का हवाला देते हुए कहा गया है कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह विदेश में फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे, खासकर जब वे खुद अपनी रक्षा नहीं कर सकते।

साथ ही याचिका में ऐसे फर्जी भर्ती नेटवर्क पर भी चिंता जताई गई है, जो लोगों को नौकरी का लालच देकर विदेश भेजते हैं और उन्हें खतरे में डाल देते हैं।

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