नई दिल्ली(एजेंसी):मुकेश अंबानी की जियो प्लेटफॉर्म्स ने SEBI के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) जमा करके औपचारिक रूप से IPO प्रोसेस शुरू कर दी है। इसके डीआरएचपी से पता चलता है कि कंपनी के शुरुआती घरेलू निवेशकों में से एक को 11,983% का जबरदस्त फायदा हुआ है।
दरअसल HFCL के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर महेंद्र नाहटा को जियो प्लेटफॉर्म्स के शुरुआती दौर में खरीदे गए शेयरों पर लगभग 121 गुना रिटर्न मिल रहा है, जिन्हें उन्होंने सिर्फ ₹10 प्रति शेयर के भाव पर खरीदा था। क्यों हो रहा है उन्हें इतना फायदा, आइए जानते हैं।
27 करोड़ नए शेयरों का होगा इश्यू
ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस से पता चलता है कि जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रस्तावित IPO पूरी तरह से 27 करोड़ इक्विटी शेयरों (हर एक की फेस वैल्यू ₹10) का एक फ्रेश इक्विटी वाला इश्यू होगा। इससे आईपीओ से आने वाली सारी राशि कंपनी को मिलेगी। इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से ‘ऑफर-फॉर-सेल’ (OFS) का कोई हिस्सा शामिल नहीं होगा।
फिलहाल, नाहटा समेत किसी भी निवेशक की आने वाले पब्लिक इश्यू में शेयर बेचने की योजना नहीं है।
ये रही पूरी कैलकुलेशन
ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने इस टेलीकॉम और डिजिटल दिग्गज कंपनी की कुल इक्विटी वैल्यू 10.7 लाख करोड़ रुपये आंकी है। इसके आधार पर, नाहटा की कुल 0.54% हिस्सेदारी (जिसे 2020 में उन्होंने कुल 47.87 करोड़ रुपये में खरीदा था) की वैल्यू इस समय लगभग 5,800 करोड़ रुपये है।
दो किश्तों में खरीदे थे शेयर
HFCL के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर ने Jio Platforms के बनने के 8 महीने बाद, 7 जुलाई 2020 को दो किश्तों में Jio में अपनी हिस्सेदारी खरीदी। नाहटा परिवार ने (जिसमें बेटे अनंत नाहटा और बेटी प्रियंका सांघी शामिल हैं) 10 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर ‘कम्पल्सरीली कन्वर्टिबल डिबेंचर्स’ (CCDs) को कन्वर्ट करके 37.04 करोड़ रुपये में 3.704 करोड़ शेयर खरीदे।
साथ ही, रिलायंस ने परिवार को 10.83 करोड़ रुपये कीमत के 1.083 करोड़ और शेयर अलॉट किए, जिससे उनकी कुल हिस्सेदारी 0.54% हो गई। इतनी हिस्सेदारी कुल 47.87 करोड़ रुपये में खरीदी गयी।
इन दिग्गजों को मिले महंगे शेयर
मेटा, गूगल, सऊदी अरब का पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड, KKR, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स, मुबाडाला, जनरल अटलांटिक, ADIA और TPG कुल मिलाकर इन 13 निवेशकों ने जियो प्लेटफॉर्म्स में कंपनी का लगभग 33% हिस्सा खरीदने के लिए कुल 1,52,056 करोड़ रुपये का निवेश किया। इनमें से अधिकतर निवेशकों ने 549.31 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से शेयरों के लिए भुगतान किया।
इनमें मेटा और गूगल को 488.34 रुपये प्रति शेयर के भाव पर शेयर मिले।
ऐसे हाथ आई जियो में हिस्सेदारी
11 जून 2010 को, नाहटा की इन्फोटेल ब्रॉडबैंड सर्विसेज ने 12,872 करोड़ रुपये में पूरे भारत के लिए टेलीकॉम स्पेक्ट्रम हासिल किया। कुछ ही घंटों में, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 4,800 करोड़ रुपये में इन्फोटेल ब्रॉडबैंड में 95% हिस्सेदारी खरीद ली, जबकि नाहटा के पास 5% हिस्सेदारी बनी रही।
इसके बाद रिलायंस ने उस स्पेक्ट्रम के लिए भुगतान किया जो इन्फोटेल ने हासिल किया था। वही 5% हिस्सेदारी, जो आगे चलकर जियो का आधार बनी, उस आधार का काम करती है जिस पर आज उनकी जियो में हिस्सेदारी है।
आईपीओ फंड का क्या करेगी कंपनी?
Jio इस इश्यू से मिली रकम में से 27,500 करोड़ रुपये का इस्तेमाल अपनी मुख्य टेलीकॉम सब्सिडियरी, रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कर्ज को समय से पहले चुकाने के लिए करेगी, जबकि बाकी रकम का इस्तेमाल आम कॉरपोरेट कामों के लिए करेगी।
रिलायंस इंडस्ट्रीज की जियो में हिस्सेदारी 66.43% है। अन्य निवेशकों में, मेटा की एफिलिएट कंपनी Jaadhu Holdings इसमें सबसे बड़ी निवेशक है, जिसके पास 9.98% हिस्सेदारी (892.3 मिलियन शेयर) है। इसके बाद गूगल इंटरनेशनल LLC का नंबर आता है, जिसके पास 7.73% हिस्सेदारी (690.9 मिलियन शेयर) है।






