नई दिल्ली(एजेंसी):हिंदी सिनेमा में कई कालजयी गीत हैं जो आज भी अमर हैं और लोगों की जुबां पर चढ़े रहते हैं। लेकिन इससे भी दिलचस्प है इन गीतों के पर्दे के पीछे के किस्से। एक ऐसा ही किस्सा है 44 साल पुराने गीत का, जिसे दिग्गज म्यूजिशियन रवींद्र जैन ने बनाया था।
क्या है पूरा किस्सा?
ये किस्सा 1982 में रिलीज हुई फिल्म ‘नदिया के पार’ (Nadiya Ke Paar) के सदाबहार गीत ‘कौन दिसा में लेके चला रे बटुहिया’ (Kaun Disa Mein Leke Chala Re Batohiya) का है। जिस वक्त हेमलता इस गाने की रिकॉर्डिंग कर रही थी तब वे अपनी प्रेग्नेंसी के 9वें महीने में थीं।
रवींद्र जैन की जिद से लिया रिस्क
इस गाने के म्यूजिक डायरेक्टर रवींद्र जैन (Ravindra Jain) की जिद थी कि वे इस गाने को हेमलता से ही रिकॉर्ड करवाएंगे। इसके बाद हेमलता ने किसी भी बात की परवाह किए बिना ये जोखिम उठाया और स्टूडियो पहुंचकर इस गाने की रिकॉर्डिंग की। उन्होंने किसी भी मजबूरी को अपने काम के आगे नहीं आने दिया।
बस फिर क्या था गाना सुपरहिट रहा। हेमलता की जादूई आवाज और रवींद्र जैन के खूबसूरत लिरिक्स ने इस गीत को हमेशा के लिए अमर बना दिया। इस गीत को फिल्म के लीड एक्टर्स सचिन पिलगांवकर (Sachin Pilgaonkar) और साधना सिंह (Sadhana Singh) पर फिल्माया गया था। इसमें हेमलता के साथ जसपाल सिंह ने भी आवाज दी थी।

‘नदिया के पार’ के बारे में
नदिया के पार 1982 में रिलीज हुई बॉलीवुड फिल्म है,जिसका निर्देशन गोविंद मुनिस ने किया है। इस फिल्म में सचिन, साधना सिंह, इंद्र ठाकुर, सविता बजाज, मिताली जैसे कलाकारों ने अहम किरदार निभाए हैं।
रवींद्र जैन और हेमलता के गाने
रवींद्र जैन और हेमलता की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई सदाबहार गीत दिए हैं। जिनमें अंखियों के झरोखों से, जब दीप जले आना, ले तो आए हो हमें सपनों के गांव में, तू जो मेरे सुर में सुर मिलाओ शामिल हैं।





















































