नई दिल्ली(एजेंसी):महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राज्य की राजनीति के सबसे ताकतवर नेताओं में गिने जाने वाले अजित अनंतराव पवार का बुधवार को निधन हो गया। वह जिस चार्टर्ड विमान से यात्रा कर रहे थे, वह पुणे जिले के बारामती के पास आपात लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। 66 वर्षीय अजित पवार की अचानक मौत से न सिर्फ महाराष्ट्र, बल्कि पूरे देश की राजनीति में गहरा शोक और सन्नाटा है।
अजित पवार सिर्फ एक नेता नहीं थे, बल्कि वह महाराष्ट्र के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में से एकपवार परिवार की अहम कड़ी थे। उनके जाने से इस परिवार की राजनीति, विरासत और भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
पवार परिवार की जड़ें
पवार परिवार की सार्वजनिक जिंदगी राजनीति से पहले सहकार आंदोलन और ग्रामीण विकास से जुड़ी रही है। अजित पवार के दादा-दादी गोविंदराव और शारदाबाई पवार ने इसकी नींव रखी।
गोविंदराव सहकारी क्षेत्र में सक्रिय थे, जबकि शारदाबाई ग्रामीण समाज के लिए काम करती थीं। साल 1938 में वह पुणे लोकल बोर्ड के लिए निर्विरोध चुनी गईं। उस दौर में किसी महिला का इस तरह चुनाव जीतना बड़ी बात थी।
गोविंदराव और शारदाबाई के 11 बच्चे थे। इनमें से कई कानून, खेती, उद्योग, मीडिया, रियल एस्टेट और राजनीति से जुड़े। इसी पीढ़ी ने आगे चलकर पवार परिवार की राजनीतिक ताकत की बुनियाद रखी।
दूसरी पीढ़ी- शरद पवार और उनके भाई-बहन
पवार परिवार की दूसरी पीढ़ी में सबसे बड़ा नाम शरद पवार का रहा। वह चार बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने, केंद्र में मंत्री रहे और बाद में नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) की स्थापना की।
उनके भाई-बहनों ने भी अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया। बड़े भाई वसंतराव वकील थे और एक जमीन विवाद में उनकी मौत हो गई। दिनकरराव खेती से जुड़े थे, अनंतराव (अजित पवार के पिता) और माधवराव का भी निधन हो चुका है। सूर्यकांत पवार वास्तुकार थे और रियल एस्टेट से जुड़े रहे।
बहनों में सरला जगताप और सरोज पाटिल ने वामपंथी और किसान आंदोलनों से जुड़े परिवारों में विवाह किया। सरोज पाटिल के पति नारायण पाटिल, किसान और मजदूर पार्टी के बड़े नेता थे। इस पीढ़ी में मतभेद जरूर थे, लेकिन परिवार एकजुट रहा
शरद पवार की अगली पीढ़ी
शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने 2009 में राजनीति में कदम रखा और बारामती से कई बार लोकसभा सांसद चुनी गईं। उनके आने से परिवार में पीढ़ीगत बदलाव शुरू हुआ।
इसी पीढ़ी में एक अहम नाम है रोहित पवार। वह शरद पवार के बड़े भाई दिनकरराव के पोते हैं। रोहित ने 2019 में करजत-जामखेड विधानसभा सीट से जीत दर्ज की और तीसरी पीढ़ी के प्रमुख नेताओं में उभरे। रोहित के उभार से परिवार के भीतर नेतृत्व को लेकर प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई।
अजित पवार- शरद पवार के साए से अपनी अलग पहचान तक
अजित अनंतराव पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को देवलाली प्रवरा में हुआ था। वह शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे थे। बचपन से ही उन्होंने अपने चाचा को राजनीति में आगे बढ़ते देखा।
उनके पिता फिल्मकार वी. शांताराम के साथ राजकमल स्टूडियो में काम करते थे, जिससे परिवार का संपर्क शहरी पेशेवर दुनिया से भी रहा। अजित पवार ने 1982 में सहकारी चीनी उद्योग से राजनीति की शुरुआत की। 1991 में वह पुणे जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने और बाद में बारामती विधानसभा सीट से लगातार चुनाव जीतते रहे।
वह कई बार उपमुख्यमंत्री बने और वित्त, योजना और जल संसाधन जैसे अहम विभाग संभाले। समय के साथ उन्होंने पश्चिमी महाराष्ट्र में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक ताकत खड़ी की।
परिवार, पत्नी और बच्चे
अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार, पूर्व मंत्री पद्मसिंह बाजीराव पाटिल की बेटी हैं। वह लंबे समय से सामाजिक और क्षेत्रीय कामों में सक्रिय रहीं। बारामती से लोकसभा चुनाव हारने के बाद वह राज्यसभा पहुंचीं।
अजित और सुनेत्रा के दो बेटे हैं। बड़े बेटे पार्थ पवार ने 2019 में मावल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इस चुनाव के बाद परिवार के भीतर मतभेद और बढ़े। छोटे बेटे जय पवार राजनीति से दूर रहे और व्यवसाय से जुड़े हैं।
2023 का विभाजन और टूटा हुआ परिवार
जुलाई 2023 में अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर NCP तोड़ी और बीजेपी–शिवसेना गठबंधन के साथ सरकार में शामिल हो गए। इससे पार्टी और परिवार दोनों में गहरी दरार पड़ गई।
अजित फिर उपमुख्यमंत्री बने, लेकिन परिवार के ज्यादातर सदस्य शरद पवार के साथ खड़े रहे। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, दोनों नेताओं ने सार्वजनिक मंचों पर निजी रिश्तों का सम्मान बनाए रखा।
अजित पवार के बाद की विरासत
अजित पवार के निधन के बाद पवार परिवार की राजनीति एक अहम मोड़ पर खड़ी है। आने वाले समय में यह तय होगा कि सुप्रिया सुले, रोहित पवार और अगली पीढ़ी इस विरासत, मतभेदों और सत्ता संतुलन को कैसे आगे बढ़ाती है।






