कोरबा@M4S:तेरस पर बाजार गुलजार रहा। खूब धन बरसा। लोगों ने जमकर खरीदारी की। सोने, चांदी के समान की बिक्री ज्यादा हुई। ऑटोमोबाइल सेक्टर में उछाल देखा गया। शुभ दिन पर शुभ मुहर्त में खरीदी करने लोगों की भीड़ ऊर्जाधानी के बाजार में सुबह से रही।
धनतेरस के दिन लोगों ने जमकर खरीदारी की। शाम को भीड़ से बचने लोग, दोपहर से ही बाजार में खरीदारी के लिए लोग पहुंच रहे थे। आम दिनों में दोपहर के समय शांत रहने वाला बाजार में लोगों की चहल पहल रही। टीपीनगर क्षेत्र में लोगों की भीड़ देखी गई। सोने, चांदी, बर्तन, कपड़े, फर्नीचर, दोपहिया व चारपहिया वाहन ,घरों में सजावट के समान सहित टेक्सटाइल्स दुकानों में लोगों की भीड़ रही। इस बार धनतेरस के लिए व्यापारियों ने काफी तैयारियां की थी। दुकानों में लोगों की जरुरत के अनुसार सामान भरा था। इधर पावर हाउस रोड, पुराना बस स्टैंड रोड, दर्री रोड, घंटाघर से निहारिका चौक तक सडक़ पर धनतेरस के मौके पर सुबह से ही चहल-पहल देखी गई। जैसे जैसे दिन चढ़ता गया मुख्य मार्ग पर स्थित दुकानों में ग्राहकों की संख्या ज्यादा देखी गई। सडक़ किनारे लोग अपनी गाडिय़ां खड़ी कर सामान की खरीदी करते हुए देखे गए। एक अनुमान के अनुसार धनतेरस के मौके पर बाजारों में लगभग 300 करोड़ रुपए से लेकर 400 करोड़ रुपए के बीच कारोबार की उम्मीद है। अकेले ऑटोमोबाइल सेक्टर में लगभग 150 करोड़ रुपए के कारोबार की बात कही जा रही है। सराफा बाजार में लगभग 100 करोड़ का व्यापार और इलेक्ट्रानिक्स में 20 करोड़ से अधिक के कारोबार का अनुमान है। कपड़ा मार्केट में तीन करोड़, फर्नीचर में एक करोड़, बर्तन व कीचन मार्केट में एक करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार होने की उम्मीद है। हालांकि देर रात तक कारोबार जारी रहेगा। व्यापारियों का कहना है कि इस साल पिछले साल की तुलना में अच्छा कारोबार हुआ है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार अधिक सामानों की हुई है।धनतेरस पर भगवान धनवंतरी की पूजा हुई। चिकित्सकों ने विधि विधान से पूजा की। सूख और समृद्धि की कामना की। कोरबा के अलावा उपनगरीय क्षेत्रों में भी धनवंतरी की पूजा की गई।
रविवार को रूप चर्तुदशी
दीपोत्सव के दूसरे दिन रविवार को रूप चर्तुदशी है। मान्यता है कि प्रात: काल सूर्योदय से पहले तेल लगाकर पत्तियां जल में डालकर स्नान करने से नरक से मुक्ति मिलती है। पूजा करने वाले लोग पापों से मुक्त हो स्वर्ग को प्राप्त करते हैं। शाम को दीपदान की प्रथा है जिसे यमराज के लिए किया जाता है। नरक चतुर्दशी, जिसे छोटी दीपावली भी कहते हैं। इसे छोटी दीवाली इसलिए कहा जाता है, क्योंकि दीवाली से एक दिन पहले रात के वक्त दीवाली की रात की तरह दीएं की रोशनी से रात के तिमिर को प्रकाश पुंज से दूर भगा दिया जाता है इस रात दीए जलाने की प्रथा के संदर्भ में कई पौराणिक कथाएं और लोक मान्यताएं हैं। एक कथा के अनुसार आज के दिन ही भगवान कृष्ण ने अत्याचारी और दुराचारी असुर नरकासुर का वध किया था और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त कर उन्हें सम्मान प्रदान किया था।
पटाखा बाजार हुआ गुलजार
दीवाली की शुरुआत के साथ ही पटाखे की दुकानों में रौनक दिखने लगी है। लाइसेंस प्राप्त पटाखा व्यवसायियों ने कोरबा के प्रियदर्शनी इंदिरा गांधी स्टेडियम परिसर में 137 दुकानें लगाई है। उपनगरीय क्षेत्रों में भी पटाखा बाजार सज गया है। करीब 125 करोड़ रुपए के कारोबार होने की संभावना है। इस बार पटाखों में चायनीज पटाखों की वैराइटी नहीं है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष पटाखों के दामों में 25 फीसदी की वृद्धि हुई है।





































