एसईसीएल प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप  12 दिसंबर से अनिश्चितकालीन गेट जाम, गेवरा खदान बंदी का ऐलान

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कोरबा@M4S:एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के अंतर्गत अधिग्रहित ग्राम नराईबोध के ग्रामीण अपने अस्तित्व और अधिकारों की लड़ाई के लिए एक बार फिर आर-पार के मूड में हैं। पूर्व में हुए त्रिपक्षीय समझौतों के बावजूद रोजगार उचित मुआवजा और पुनर्वास जैसी मूलभूत मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई न होने से नाराज ग्रामीणों ने 12 दिसंबर से गेवरा खदान और संबंधित ठेका कंपनी (पीएनसी इंफ्राटेक) के कार्यों को पूर्णत: ठप्प कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है ।
ग्रामीणों का कहना है कि जिला प्रशासन ग्रामीण और एसईसीएल प्रबंधन के बीच हुई त्रिपक्षीय बैठक में नौकरी, मुआवजा और वैकल्पिक रोजगार पर सहमति बनी थी, लेकिन धरातल पर अब तक कोई सार्थक कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेका कंपनियां अपनी मनमर्जी से भर्ती कर रही हैं जबकि जमीन देने वाले प्रभावित परिवारों के शिक्षित बेरोजगार दर-दर भटक रहे हैं। बसाहट स्थल पर विकास कार्य शून्य हैं जिससे विस्थापितों का जीवन कष्टप्रद हो गया है। ग्रामीणों ने पहले 8 और 9 दिसंबर को तालाबंदी की चेतावनी दी थी हालांकि 7 दिसंबर को एसईसीएल प्रबंधन के साथ हुई चर्चा और आगामी पूजा कार्यक्रमों को देखते हुए ग्रामीणों ने प्रबंधन को 11 दिसंबर तक का अंतिम समय (अल्टीमेटम) दिया है। ग्राम नराईबोध की पार्षद अमिला पटेल ने कहा कि हमने अपनी जमीनें एसईसीएल को दीं, लेकिन बदले में हमें सिर्फ आश्वासन मिला। यदि 11 दिसंबर तक हमारी मांगों पर कोई ठोस आदेश पारित नहीं होता है तो 12 दिसंबर से पूरे गांव के लोग खदान और गेट बंदी करने के लिए बाध्य होंगे। आंदोलन की सूचना विधायक कटघोरा, जिलाधीश, पुलिस अधीक्षक और एसईसीएल के उच्च अधिकारियों को भी दी जा चुकी है।

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