जवाब देने में बचते नजर आए प्रवास पर पहुंचे एमडी भीम सिंह
कोरबा। छत्तीसगढ़ विद्युत वितरण विभाग में निलंबन और फिर बहाली का अजब-गजब मामला सामने आया है। वितरण विभाग के एमडी की नाराजगी के बाद जहां कोरबा के अधीक्षण अभियंता को दो दिन पहले निलंबित कर दिया गया था। वहीं निलंबन आदेश जारी होने के बाद…..उतनी ही तेज गति से बहाली का आदेश जारी किया गया। निलंबन और बहाली के इस अजब-गजब प्रकरण के संबंध में कोरबा प्रवास पर पहुंचे एमडी भीम सिंह से जब सवाल किया गया, तब वे जवाब देने से बचते नजर आये और कह दिया अभी ये सवाल इससे हट कर है।
गौरतलब है कि कोरबा में विद्युत वितरण विभाग के एमडी भीम सिंह के निर्देशों की अनदेखी पर अधीक्षण अभियंता बी.के.सरकार और कटघोरा के कार्यपालन अभियंता अंशु वार्ष्णेय को भारी पड़ गया था। एमडी के निर्देश पर दोनों अधिकारियों को 23 मार्च का निलंबित कर दिया गया था। विभागीय अधिकारियों की माने तो निलंबन की वजह एमडी के कोरबा दौरे के दौरान लेमरू क्षेत्र के देवपहरी गांव में लो वोल्टेज की समस्या से निजात दिलाने के लिए गांव तक 11 केवी लाइन विस्तार के निर्देश दिये थे। साथ ही इस कार्य का तत्काल प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेजने का निर्देश दिया गया था, लेकिन समय बीतने के साथ ही जवाबदार अधिकारियों ने प्रस्ताव बनाने के बाद मुख्यालय भेजना जरूरी नही समझा। उधर इस पूरे मामले पर जब एमडी ने कार्य की प्रगति की समीक्षा की, तो जवाबदार अधिकारियों की लापरवाही सामने आ गयी। इस गंभीर लापरवाही पर एमडी भीम सिंह की गहरी नाराजगी के बाद अधीक्षण अभियंता बी.के.सरकार और कार्यपालन अभियंता अंशु वार्ष्णेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। कार्य में गंभीर लापरवाही के मामले में निलंबन आदेश के बाद वितरण विभाग में हड़कंप मच गया था। बताया जा रहा है कि एमडी की नाराजगी के बाद अधिकारी कुछ समझ पाते इसी बीच इस आदेश के दो दिन बाद ही फिर से एक नया आदेश जारी किया गया। जिसमें निलंबित अधीक्षण अभियंता बी.के.सरकार को बहाल करते हुए रायपुर पदस्थापना दिया गया। इस आदेश के जारी होने के बाद विद्युत वितरण विभाग की कार्य प्रणाली सवालों के घेरे में है। वहीं बुधवार को कोरबा प्रवास पर पहुंचे वितरण विभाग के एमडी से जब इस मुद्दे पर सवाल किया गया, तो वे जवाब देने से बचते नजर आये। मीडिया ने जब उनसे निलंबन के मुद्दे पर सवाल किया, तो उन्होने कार्य में लापरवाही की बात कह दी, लेकिन जब उनसे 48 घंटे के भीतर दोबारा बहाली किये जाने का जब सवाल पूछा गया, तो वे गोलमोल जवाब देकर कैमरे से बचकर आगे बढ़ गये।
आदेश के 48 घंटे बाद ही निलंबित अधीक्षण अभियंता की बहाली पर उठने लगे सवाल
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