‘लोगों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं’, जंक फूड पर लगेगा वॉर्निंग लेबल; SC का केंद्र सरकार को अल्टीमेटम

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नई दिल्ली(एजेंसी):देश में बच्चों और युवाओं के बीच तेजी से बढ़ते मोटापे और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा है कि मोटापे की समस्या तेजी बढ़ रही है और लोगों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जा सकता है।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने जंक फूड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैकेट वार्निंग लेबल (चेतावनी वाले लेबल) अनिवार्य रूप से लागू करने के लिए केंद्र सरकार चेतावनी दी है।
20 साल में पांच गुना बढ़ी मोटापा की समस्या

दरअसल, बच्चों और बड़ों में मोटापे की समस्या पिछले 20 साल में पांच गुना तक बढ़ गई है। साल 2000 से 2022 के बीच स्कूल जाने वाले बच्चों और किशोरों में मोटापे की दर 2% से बढ़कर 10% हो गई है।

इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के मुताबिक, भारत का अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड मार्केट 2009 और 2023 के बीच 150% से ज्यादा बढ़ा, जबकि मोटापा दोगुना हो गया।

ज्यादा नमक चीनी सेहत के लिए खतरा

SC ने कहा कि ज्यादा नमक, चीनी, सैचुरेटेड फैट और कैलोरी वाला खाना सेहत के लिए खतरा बन सकता है और सेहत के लिए सही फैसले लेने में मदद के लिए साफ न्यूट्रिशन जानकारी दिखाई जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश NGO ‘3S एंड अवर हेल्थ सोसाइटी’ की PIL के जवाब में आया है, जिसे एडवोकेट राजीव शंकर द्विवेदी के जरिए दाखिल किया गया था। इस फैसले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा लोगों की हेल्थ से समझौता नहीं किया जा सकता है।

दो हफ्टे का अल्टीमेटम

केंद्र को जंक फूड के पैकेट पर सामने की ओर ही चेतावनी लेबल लगाने के अपने आदेश को लागू करना होगा। इस बाबत कोर्ट ने केंद्र सरकार को दो हफ्ते का अल्टीमेटम दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “अगर यूनियन खुद से ऐसा करती है, तो ठीक है, नहीं तो हम आगे के निर्देश देंगे… हम यूनियन के इस रुख को मंजूर नहीं करते जब वह कहता है कि इंटरनेशनल स्टैंडर्ड, खासकर डेवलप्ड देशों के साथ मैच करना मुमकिन नहीं है। क्या भारत को एक अंडरडेवलप्ड देश ही रहना चाहिए?”

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