वन अधिकार मंच छत्तीसगढ़ की एक दिवसीय बैठक का सफल आयोजन वनाधिकार से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर लिए गए अहम निर्णय

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रायपुर@M4S:वन अधिकार मंच छत्तीसगढ़ की एक दिवसीय राज्य स्तरीय बैठक का सफल आयोजन रायपुर में किया गया, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से सामाजिक कार्यकर्ता, जन संगठनों के प्रतिनिधि और विषय विशेषज्ञ शामिल हुए। बैठक में वन अधिकार अधिनियम की वर्तमान स्थिति, संरक्षित क्षेत्रों में विस्थापन, सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन (CFR) की प्रक्रिया, ग्राम सभा फेडरेशन के निर्माण, और नेटवर्क सदस्यों की क्षमता वृद्धि योजनाओं पर गंभीर मंथन हुआ।

बैठक में कांकेर और नारायणपुर जिलों में कार्यरत दिशा समाज संस्था ने बताया कि 60 ग्राम सभाओं में काम हो रहा है, लेकिन सचिवों की कमी और नक्सली प्रभाव के कारण चुनौतियाँ बनी हुई हैं। अब तक 25 ग्राम सभाओं के दावे तैयार हो चुके हैं, जबकि अभूजमाड़ क्षेत्र में प्रक्रियात्मक अड़चनें अब भी जारी हैं।

कवर्धा में पंचायत सचिवों की भूमिका और अड़चनों पर चर्चा हुई, वहीं रायगढ़ के लैगुंगा क्षेत्र में गलत अधिकार पत्रक जारी होने के कारण CFR प्रबंधन में परेशानी का मुद्दा सामने आया। भानुप्रतापपुर (कांकेर) में CFR प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है, जबकि पंडरिया क्षेत्र में 10 ग्राम सभाओं की हैबिटेट राइट प्रक्रिया प्रगति पर है।

वक्ताओं में विजेंद्र अजनबी ने हैबिटेट अधिकारों में पारंपरिक प्रणालियों को मान्यता देने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। अचानकमार टाइगर रिजर्व की स्थिति पर सीमांचल ने जानकारी साझा की और बैगा समुदाय के साथ संवाद की आवश्यकता बताई। चंद्रप्रताप उईके ने डिस्ट्रिक्ट लेवल कमेटी (DLC) के गठन में देरी और अवैध रेत खनन को प्रमुख समस्या बताया।

मुंगेली में विस्थापन की जानकारी सत्य प्रकाश बुनकर ने दी। महासमुंद और बलौदा बाजार से आए प्रतिनिधियों ने वन विभाग द्वारा की गई मारपीट की घटनाओं की जानकारी साझा की और एक संयुक्त फैक्ट फाइंडिंग टीम (जिसमें PUCL, VAM, पत्रकार और वकील शामिल हों) गठित करने का प्रस्ताव रखा।

चंद्रकांत यादव ने भोरमदेव को गौ-अभयारण्य घोषित किए जाने और पीवीटीजी समुदायों के अधिकारों पर चर्चा की कमी को लेकर चिंता जताई। डॉ. ऋषि ने कोरबा हाथी रिजर्व की स्थिति और राज्य की जल नीति में बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया।

सरगुजा से आए प्रतिनिधियों ने बताया कि 30 ग्राम सभाओं में सामुदायिक वन प्रबंधन योजना तैयार हो चुकी है, लेकिन नरेगा का उपयोग सीमित है। इस योजना को वन प्रबंधन के साथ जोड़ने पर बल दिया गया।

विजेंद्र अजनबी ने सामुदायिक सुशासन, विकेंद्रीकरण और ग्राम सभाओं के अधिकारों (विशेषतः तेंदूपत्ता और अन्य लघु वनोपज) को सशक्त करने की बात कही। अनुभव शोरी ने मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों से मिलकर राज्य स्तर पर समन्वय समिति के गठन का प्रस्ताव रखा। इस दिशा में अगले सप्ताह तक ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।

बैठक में नेटवर्क की नियमित ऑनलाइन बैठकें आयोजित करने पर सहमति बनी। साथ ही, 15 जुलाई को अचानकमार में विस्थापन पर विशेष बैठक आयोजित करने और पीवीटीजी अधिकारों के अध्ययन के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया।

बैठक में कई वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें राजेश रंजन, बिपाशा पॉल, सत्यप्रकाश बुनकर, सीमांचल, देवेंद्र बघेल, केशव शोरी, चंद्रप्रताप उईके, चंद्रकांत यादव, आलोक शुक्ला, विजेंद्र अजनबी, डॉ. ऋषि, प्रियांशु गुप्ता (प्राध्यापक, IIM), लोकनाथ सोनवानी एवं अन्य शामिल थे।

सभी प्रतिभागियों ने एकमत से वन अधिकारों की दिशा में साझा प्रयासों को और सशक्त करने का संकल्प लिया।

 

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