नेशनल मेडिकल कमीशन ने MBBS पूरा करने के लिए 10 साल की समय सीमा का प्रस्ताव रखा, क्या है मौजूदा नियम?

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नई दिल्ली(एजेंसी):मेडिकल छात्रों को जल्द ही अपना MBBS कोर्स पूरा करने के लिए एक अतिरिक्त साल मिल सकते हैं,क्योंकि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने अंडरग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा पूरी करने की अधिकतम अवधि को नौ साल से बढ़ाकर दस साल करने का प्रस्ताव दिया है।

ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशंस 2023 में एक ड्राफ्ट संशोधन में एनएमसी ने प्रस्ताव दिया है कि किसी भी छात्र को एमबीबीएस प्रोग्राम में शामिल होने के दस साल से ज्यादा समय तक अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स जारी रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिसमें अनिवार्य रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप भी शामिल है। मौजूदा नियम प्रवेश की तारीख से अवधि को नौ साल तक सीमित करता है।

इन छात्रों को मिलेगा लाभ

इस संशोधन से उन छात्रों को लाभ होने की उम्मीद है,जिनकी शिक्षा शैक्षणिक बाधाओं, स्वास्थ्य समस्याओं, पारिवारिक परिस्थितियों या अन्य अप्रत्याशित कारणों से डिले हो गई है।

मेडिकल छात्रों के लिए एक अतिरिक्त वर्ष

मौजूदा नियम (GMER 2023)

  • एमबीबीएस पूरा करने की अधिकतम अवधि: 9 वर्ष
  • फर्स्ट प्रोफेशनल एमबीबीएस में अधिकतम प्रयास: 4
प्रस्तावित संशोधन (2026)
  • एमबीबीएस पूरा करने की अधिकतम अवधि: 10 वर्ष
  • इंटर्नशिप 10 वर्ष की सीमा के भीतर ही शामिल होगी
  • फर्स्ट प्रोफेशनल एमबीबीएस में अधिकतम प्रयास 4 ही रहेंगे

‘गैजेट ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित मसौदा अधिसूचना को टिप्पणियों और सुझावों के लिए सार्वजनिक डोमेन में रखा गया है। एनएमसी ने मेडिकल कॉलेजों, छात्रों, फैकल्टी सदस्यों और अन्य हितधारकों से फीडबैक मांगा है। इसमें कहा गया है कि संशोधन को अंतिम रूप देने से पहले 30 दिनों के भीतर प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर विचार किया जाएगा।

यह बदलाव ‘कम्पेटेंसी-बेस्ड ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशंस, 2023’ के लागू होने के लगभग तीन साल बाद आया है, जिसमें अंडरग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा की अवधि को नौ साल तक सीमित कर दिया गया था।

विशेषज्ञों का क्या कहना है?

चिकित्सा शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रस्ताव इस बात को स्वीकार करता है कि छात्रों के एक छोटे से वर्ग को कोर्स के दौरान आने वाली रुकावटों के कारण अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता हो सकती है।

उन्होंने बताया कि हालांकि यह संशोधन अधिक लचीला है लेकिन यह शैक्षणिक मानकों को कमजोर नहीं करता, क्योंकि फर्स्ट प्रोफेशनल एमबीबीएस परीक्षा में चार प्रयासों की सीमा अभी भी बरकरार है।

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