नई दिल्ली(एजेंसी):ग्रामीण भारत की आर्थिक तस्वीर बदलने के बाद अब लखपति दीदियां पर्यावरण संरक्षण की नई ताकत बनकर सामने आ रही हैं। देश में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी तीन करोड़ से अधिक महिलाएं लखपति बन चुकी हैं और अब उन्हें बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान से जोड़ने की तैयारी है।
वहीं कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिए हैं कि उनके मंत्रालयों के सभी कार्यक्रमों की शुरुआत पौधा लगाकर की जाएगी। यहां तक कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले घरों और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत बनने वाली सड़कों के किनारे भी पौधे लगाना अनिवार्य किया जाएगा।
बनेगा पेड़ बैंक
शिवराज सिंह चौहान के एक पौधा प्रतिदिन संकल्प के पांच वर्ष पूरे होने पर दिल्ली में गुरुवार को विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें उन्होंने ‘पेड़ बैंक’ बनाने और ‘अंकुर’ जैसे मंच का सुझाव भी दिया। शिवराज का मानना है कि यदि हर कार्यक्रम की शुरुआत पौधारोपण से हो तो यह धीरे-धीरे जनआंदोलन का रूप ले सकता है, क्योंकि यह पहल सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
पेड़ बैंक में पीपल, वट, नीम एवं आम आदि जैसे पारंपरिक एवं पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधे उपलब्ध रहें। जो लोग स्वयं पौधा लगाना चाहते हैं, वे अपने हाथों से लगाएं। जिनके पास समय नहीं है, वे छोटी राशि देकर अपने नाम से पौधारोपण करवा सकेंगे।
संस्था की ओर से गड्ढा खोदने, सिंचाई और पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी ली जाएगी। इससे पौधे लगाने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी।लखपति दीदियों को इस अभियान का प्रमुख आधार माना जा रहा है। गांवों में सक्रिय स्वयं सहायता समूह पहले ही आजीविका, पोषण और स्वच्छता जैसे अभियानों में अहम भूमिका निभा चुके हैं।
‘एक पौधा प्रतिदिन’ संकल्प
अब उन्हें पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर गांव-गांव हरित पट्टी विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रामीण सड़कों, आवास योजनाओं और कृषि कार्यक्रमों के साथ पौधारोपण जोड़ने से यह पहल केवल सरकारी कार्यक्रम न रहकर सामाजिक भागीदारी का माडल बन सकती है।
इस अभियान की प्रेरणा चौहान के ‘एक पौधा प्रतिदिन’ संकल्प से जुड़ी है, जिसकी शुरुआत उन्होंने 19 फरवरी 2021 को नर्मदा जयंती के अवसर पर अमरकंटक में की थी। तब से लेकर अब तक वे 6100 सौ पौधे लगा चुके हैं।
इससे पहले मध्य प्रदेश में नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान करोड़ों पौधे लगाए गए थे। उसी क्रम में ‘अंकुर’ जैसे मंच की परिकल्पना की गई थी, जहां लोग पौधा लगाकर उसकी तस्वीर साझा करते थे और उसकी देखभाल का संकल्प लेते थे। अब इसी माडल को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की तैयारी है।
और क्या दिखेगा बदलाव?
एक अन्य बड़ा बदलाव सम्मान की परंपरा में दिख सकता है। शिवराज ने अपने स्वागत में फूल-माला या स्मृति चिह्न के बदले पौधा लगाकर उसकी फोटो भेंट करने का आग्रह किया गया है। इसी तरह कृषि मंत्रालय के अधीन आने वाले कृषि विश्वविद्यालयों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और ग्रामीण विकास मंत्रालय के सभी कार्यक्रम पौधारोपण से शुरू किए जाने का निर्देश दिया है।
विद्यार्थियों को भी जन्मदिन जैसे अवसरों पर पौधा लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। यदि करोड़ों लोग साल में एक-एक पौधा भी लगाएं और उसकी देखभाल करें तो देश में हरित क्रांति का नया अध्याय शुरू हो सकता है।






