25 बरस में ऊर्जानगरी का औद्योगिक विकास 6 गुना बढ़ा  57 से बढ़कर 391 उद्योग हुए स्थापित

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कोरबा@M4S:छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के साथ वर्ष 2000 में ऊर्जाधानी कोरबा के भी विकास की यात्रा प्रारंभ हुई। इस यात्रा में जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र कोरबा ने बीते ढाई दशक में बिजली कारखानों के साथ ही साथ स्थानीय उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिला। स्वरोजगार को बढ़ावा देने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम हुए हैं। हालांकि एल्युमिनियम पार्क सहित बड़ी तादाद में सहायक उद्योग अब भी कोरबा में नहीं लग पाए हैं।बावजूद इसके स्वरोजगार के क्षेत्र में बीते 25 वर्षों में कोरबा में कारगर काम हुए हैं।


कोरबा को ऊर्जानगरी के नाम से जाना जाता है। आत्मनिर्भर भारत और मजबूत छत्तीसगढ़ बनाने के उद्देश्य से जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र कोरबा द्वारा स्वरोजगार और उद्योगों के क्षेत्र में काम हुए है। वर्ष 2000 के दौरान जिले में केवल 57 स्थापित उद्योग पंजीकृत थे। समय के साथ योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और शासन की उद्योग नीतियों के फलस्वरूप यह संख्या वर्ष 2025 तक बढ़कर 391 उद्योगों तक पहुंच गई है। इससे सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी का इंतजाम हुआ है। यह वृद्धि न केवल स्थानीय आर्थिक विकास के साथ युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने में भी सहायक रही है।  वर्ष 2000 में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना के अंतर्गत कोई भी लाभार्थी नहीं था, लेकिन वर्ष 2025 तक 451 हितग्राहियों को योजना के तहत बैंक ऋण के माध्यम से सहायता प्राप्त हुई। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना (पीएमईजीपी) का मुख्य उद्देश्य युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना है। जिससे वो अपने स्वयं के सूक्ष्म और लघु उद्योग स्थापित कर सकें। इससे न केवल आत्मनिर्भरता को बल मिला, बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियाँ भी सशक्त हुईं। कोरबा की पहचान केवल कोयला और बिजली से है। अब खाद्य उत्पादों के कम भी शुरू हुए हैं। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के अंतर्गत राज्य गठन के समय हितग्राहियों की संख्या निरंक थी। वर्ष 2025 तक 30 लाभार्थियों को सहायता प्रदान की गई। इस योजना के अंतर्गत स्थानीय स्तर पर पारंपरिक खाद्य उत्पादों को आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयों के माध्यम से बढ़ावा दिया गया। बैंक से ऋण सहायता और क्रेडिट लिंक्ड पूंजी अनुदान के माध्यम से इन इकाइयों की स्थापना हुई, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लघु खाद्य उद्योगों का विकास हुआ। विभाग की इन योजनाओं के जरिए आम लोगों की जिंदगी में बदलाव आया है
बेरोजगार युवा अब उद्यमी बन रहे हैं। महिलाएं अपने ब्रांड चला रही हैं।शहर के साथ साथ गाँवों में भी उद्योगों की नींव रखी जा चुकी है।

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