नई दिल्ली(एजेंसी):सोना खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए बड़ी खबर है। अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच गोल्ड मार्केट में पिछले 17 सालों की सबसे बड़ी गिरावट (Gold Price Crash ) दर्ज की गई है। मार्च महीने में सोने की कीमतें करीब 14.5 प्रतिशत तक लुढ़क गई हैं। इससे पहले इतनी बड़ी गिरावट अक्टूबर 2008 में देखी गई थी, तब दाम 16.8 प्रतिशत तक गिरे थे।
कॉमेक्स (Comex) मार्केट पर गौर करें तो इस महीने की शुरुआत में जो सोना 5,400 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था, वह अब गिरकर 4,600 डॉलर के करीब (Gold Price Today) आ गया है।
क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने के टूटने के पीछे चार बड़े कारण रहे:
- मुनाफावसूली (Profit Booking): ऊंचे दामों पर निवेशकों ने बड़े पैमाने पर सोना बेचकर अपना मुनाफा निकाला।
- डॉलर इंडेक्स में मजबूती: अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना दबाव में आ गया।
- बॉन्ड यील्ड: सरकारी बॉन्ड से मिलने वाले रिटर्न में बढ़ोतरी ने निवेशकों का ध्यान सोने से हटाकर बॉन्ड की तरफ खींचा।
- कच्चे तेल में तेजी: क्रूड ऑयल जैसी अन्य कमोडिटी की कीमतों में उछाल ने भी सोने पर नकारात्मक असर डाला।
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सोने के मिजाज में क्यों आया बदलाव?
कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता का कहना है कि,
पिछले चार सालों में सोने के व्यवहार का तरीका पूरी तरह बदल गया है। यूक्रेन युद्ध से पहले सोने का रिश्ता डॉलर और बॉन्ड यील्ड से उल्टा होता था। यानी डॉलर गिरता था, तो सोना चढ़ता था। लेकिन 2025 और 2026 की शुरुआत में यह रिश्ता उलट गया और सब कुछ बढ़ने के बावजूद सोना भी तेजी से ऊपर गया।”
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद सोने ने एक बार फिर अपना पुराना मिजाज अपना लिया है। अब जैसे ही बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स बढ़ रहे हैं, सोने की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है।
एक साल में अब भी रिकॉर्ड स्तर पर
भले ही एक महीने में सोने ने गोता लगाया हो, लेकिन लंबी अवधि में यह अब भी मजबूत है। आंकड़ों के मुताबिक, बीते एक साल में डॉलर के मुकाबले सोने की कीमतों में 45 प्रतिशत से अधिक की रिकॉर्ड रैली आई है।
वहीं, पिछले छह महीनों के ट्रैक रिकॉर्ड को देखें तो यह करीब 18 प्रतिशत की बढ़त पर बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट को नए निवेश के अवसर के रूप में देखा जा सकता है।





































