नई दिल्ली(एजेंसी):आज के समय में शायद ही कोई ऐसा हो, जिसमें कभी ऊनो (UNO) न खेला हो। मौजूदा समय में यह गेम लगभग हर किसी का फेवरेट बन चुका है। बच्चे हो या बड़े, हर कोई इसका दीवाना हो चुका है। यह गेम है कि कुछ ऐसा, जिसे खेलने एक बार बैठ जाए, तो फिर उठने का मन नहीं करता है।
पहले जहां ताश के पत्तों से खेलने का दौर हुआ करता था, वहीं अब हर कोई ऊनो कार्ड्स से खेलता नजर आता है, लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि आखिर लगभग पूरी दुनिया में खेला जाने वाला यह गेम आखिर में आया कहां से। अगर आप यह सोच रहे हैं कि किसी महान वैज्ञानिक या खोजकर्ता ने इस गेम को बड़ी ही तसल्ली के साथ बनाया होगा, तो आप पूरी तरह गलत है। जी हां, इस गेम के बनने की कहानी सुनकर आपके भी होश उड़ जाएंगे। आइए जानते हैं आज इसी गेम की दिलचस्प कहानी के बारे में-
कैसे हुई ऊनो की शुरुआत?
कहानी की शुरुआत पेशे से एक नाई मर्ल रॉबिन्स से होती है, जिन्होंने साल 1971 में ‘ऊनो’ (Uno) गेम बनाया था। मर्ल और उनके परिवार को ताश के खेल खेलना बहुत पसंद था और उनका पसंदीदा गेम ‘क्रेजी एट्स’ (Crazy Eights) था, लेकिन उस गेम की परेशानी थी- उसके मुश्किल और बदलते नियम, जो अक्सर मस्ती-मजाक के बीच परिवार में बहस का कारण बन जाते थे। इस गेम की वजह से बार-बार होने वाली इसी बहस ने रॉबिन्स को एक नया गेम बनाने के लिए प्रेरित किया।
पारंपरिक ताश के हर नए गेम के साथ बदलने वाले खास नियमों को याद रखना मुश्किल होता था। ऐसे में मर्ल ने एक नया तरीका निकाला और उन्होंने हर कार्ड का खास एक्शन सीधे उसी कार्ड पर पेन से लिख दिया। जल्द ही उन्हें और उनके परिवार को एहसास हुआ कि उन्होंने असल में एक बिल्कुल नया ताश का खेल बना लिया है।
यह ‘क्रेजी एट्स’ से अलग था, क्योंकि इसमें नियम बदलते नहीं थे; वे हर कार्ड पर ही लिखे होते थे। साथ ही इस खेल ही खासियत यह थी कि अब कम उम्र के खिलाड़ी भी इस गेम का मजा ले सकते थे, जबकि ज्यादा अनुभवी खिलाड़ी जीतने के लिए खास रणनीतियां अपना सकते थे।
शुरुआत में छपवाईं गेम की 5,000 कॉपियां
बस फिर क्या था इस गेम को रॉबिन्स अपनी दुकान पर आने वाले कस्टमर्स को यह गेम खेलने को दिया और लोगों की इसमें दिलचस्पी देखते हुए मर्ल और उनकी पत्नी ने कुछ बड़ा करने का सोचा। फंडिंग के लिए अपना घर बेचने का रिस्क उठाकर उन्होंने अपने गेम की 5,000 कॉपियां छपवाईं और उन्हें बेचने के लिए निकल पड़े। अपने पीछे एक कैंपर खींचते हुए, रॉबिन्स परिवार ने ओहियो से टेक्सास और फ्लोरिडा तक का सफर किया और रास्ते में हर कैंपग्राउंड क्लबहाउस में ‘ऊनो’ (Uno) बेचा।
जब वे वापस घर लौटे, तो वे सभी 5,000 डेक बेच चुके थे और फिर एक लेवल ऊपर जाते हुए उन्होंने बेहतरीन मार्केटर बॉब टेजक के साथ हाथ मिलाया। बॉब ने गेम और उसकी पैकेजिंग को नए सिरे से डिजाइन किया और 1980 के दशक और उसके बाद भी जबरदस्त बिक्री के साथ ‘ऊनो’ को प्रमोट किया। दुनियाभर में ऊनो की मिली लोकप्रियता के चलते रॉबिन्स ने नाई का काम छोड़ दिया और अपने सपने को सच कर दिखाया।







