वित्तीय वर्ष 2025–26 में कोल इंडिया का प्रदर्शन: चुनौतियों के बीच संतुलित प्रगति, कई क्षेत्रों में सुधार के संकेत

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कोरबा@M4S:देश की ऊर्जा सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने वाली Coal India Limited (CIL) ने वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान 768.14 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया। यह निर्धारित लक्ष्य का लगभग 87.8% है। पिछले वर्ष की तुलना में उत्पादन में 1.65% की मामूली गिरावट दर्ज की गई, जो मुख्यतः मांग और परिचालन परिस्थितियों से प्रभावित रही।
हालांकि, इस अवधि में CIL की तीन अनुषंगी कंपनियों — SECL, NCL और ECL — ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए उत्पादन में वृद्धि दर्ज की। इनमें SECL ने 5.25% की उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की, जो इसे समूह की प्रमुख प्रदर्शनकारी इकाइयों में शामिल करता है।
उत्पादन के मामले में Mahanadi Coalfields Limited (MCL) ने 218.31 मिलियन टन उत्पादन के साथ शीर्ष स्थान प्राप्त किया और कुल उत्पादन में लगभग 28% योगदान दिया। वहीं Northern Coalfields Limited (NCL) ने लगातार चौथे वर्ष अपना लक्ष्य पार करते हुए 100% से अधिक उपलब्धि दर्ज की।
देश की सबसे बड़ी खदानों में शामिल Gevra Coal Mine ने एक बार फिर अग्रणी भूमिका निभाते हुए 55.80 मिलियन टन उत्पादन किया और अपनी शीर्ष स्थिति बरकरार रखी।
भूमिगत खनन (Underground Mining) में हल्की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि Mass Production Technology के उपयोग से उत्पादन में लगभग 13.78% की वृद्धि हुई। साथ ही Surface Miner आधारित उत्पादन भी बढ़कर 463.01 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
 ओवरबर्डन रिमूवल (OBR): भविष्य की तैयारी
CIL ने वर्ष 2025–26 में 1985.42 मिलियन क्यूबिक मीटर ओवरबर्डन हटाया, जो लक्ष्य का लगभग 94.5% है। हालांकि इसमें हल्की गिरावट रही, लेकिन ECL, SECL और NEC ने अपने-अपने लक्ष्य से अधिक प्रदर्शन किया।
विशेषज्ञों के अनुसार, बेहतर OBR भविष्य में उत्पादन बढ़ाने की मजबूत नींव तैयार करता है और आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में सहायक होगा।
 कोल ऑफटेक और डिस्पैच: मांग के अनुरूप संतुलन
वित्तीय वर्ष 2025–26 में CIL का कुल कोल ऑफटेक 744.8 मिलियन टन रहा, जो वार्षिक लक्ष्य का लगभग 82.7% है। इसमें पिछले वर्ष की तुलना में 2.4% की मामूली गिरावट दर्ज की गई। इसका प्रमुख कारण पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयला स्टॉक और मांग में कमी रहा।
इसके विपरीत, South Eastern Coalfields Limited (SECL) ने 178.6 मिलियन टन डिस्पैच करते हुए 4.6% की वृद्धि दर्ज की, जो इसकी मजबूत सप्लाई और लॉजिस्टिक्स क्षमता को दर्शाता है।
गैर-विद्युत क्षेत्र (Non-Power Sector) में मांग बढ़ने के कारण इस सेगमेंट में 6.2% की वृद्धि दर्ज की गई, जो औद्योगिक गतिविधियों में सुधार का संकेत है।
 लॉजिस्टिक्स और दक्षता में सुधार
हालांकि औसत रेक लोडिंग में हल्की कमी दर्ज की गई, लेकिन Silo Loading Infrastructure में सुधार से संचालन दक्षता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है:
•IR Silos के माध्यम से लोडिंग में 42% की वृद्धि
•Under-loading charges में लगभग 26% की कमी
•लोडिंग समय में भी सुधार
ये पहलें लागत कम करने और कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही हैं।  
Coal India Limited ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में बदलती ऊर्जा परिस्थितियों के बीच संतुलित प्रदर्शन किया है। जहां कुछ प्रमुख क्षेत्रों में हल्की गिरावट रही, वहीं परिचालन सुधार और लॉजिस्टिक दक्षता में वृद्धि भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत देती है।

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