क्या जागते हुए भी पूरी हो सकती है नींद की कमी? चूहों पर हुए टेस्ट ने किया वैज्ञानिकों को हैरान

- Advertisement -

नई दिल्ली(एजेंसी):क्या आपने कभी सोचा है कि आप जागते रहें और अपने आस-पास की चीजों को महसूस करते रहें, लेकिन आपके दिमाग को नींद वाले सारे फायदे मिल जाएं? विज्ञानियों ने हाल ही में कुछ ऐसा ही कर दिखाया है।

उन्होंने जागते हुए चूहों के अंदर एक ऐसी ‘नींद जैसी’ स्थिति पैदा करने में सफलता पाई है, जिससे नींद की कमी के असर को कम किया जा सकता है। इससे विज्ञानियों को यह समझने में भी काफी मदद मिल रही है कि नींद से हमारे शरीर और दिमाग को असल में क्या-क्या फायदे होते हैं।

कैसे हुआ यह अनोखा प्रयोग?

‘नेचर न्यूरोसाइंस’ जर्नल में प्रकाशित इस रिसर्च में विज्ञानियों ने कुछ ऐसे चूहों को लिया जिनकी नींद पूरी नहीं हुई थी। इसके बाद उन्होंने चूहों के अंदर जेनेटिक बदलाव किए और ‘लाइट-पल्सिंग इम्प्लांट’ तकनीक का इस्तेमाल किया।

इस तकनीक की मदद से विज्ञानियों ने चूहों के दिमाग के एक खास हिस्से में 30 मिनट तक रुक-रुक कर एक विशेष एक्टिविटी पैदा की। यह एक्टिविटी बिल्कुल वैसी ही थी, जैसी आरामदेह नींद यानी ‘नॉन-रैपिड आई मूवमेंट’ के दौरान हमारे दिमाग में होती है।

आधा दिमाग सोएगा, और आधा जागेगा

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन में साइकियाट्री की प्रोफेसर चियारा सिरेली ने इस पूरी प्रक्रिया को बड़ी ही आसानी से समझाया है। उन्होंने बताया, “हम असल में दिमाग के एक खास हिस्से में नींद लाने का काम कर रहे हैं।”

जब दिमाग का यह सोया हुआ हिस्सा हमारी यादों को पक्का कर रहा होता है और कुछ नया सीखने की क्षमता को वापस ला रहा होता है, तब भी दिमाग का बाकी हिस्सा पूरी तरह से अलर्ट रहता है। यानी, चूहा अपने आस-पास के माहौल से जुड़ा रहता है। प्रोफेसर सिरेली ने बताया कि डॉल्फिन भी बिल्कुल ऐसा ही करती हैं, वे एक बार में अपने दिमाग के सिर्फ एक हिस्से से ही सोती हैं।

क्या होती है NREM नींद?

इस रिसर्च में जिस NREM नींद की नकल की गई है, वह इंसानों के लिए बहुत अहम है। वयस्कों की कुल नींद का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा NREM नींद ही होता है। यह हमारी नींद के चक्र का वह सबसे सुकून भरा चरण है, जब हमारे दिमाग की हलचल, दिल की धड़कन और सांस लेने की गति एकदम धीमी हो जाती है और शरीर को पूरी तरह आराम मिलता है।

Related Articles