फाइलों में दबा हसदेव एक्सप्रेस के विस्तार का प्रयास  भिलाई और दुर्ग से नहीं जुड़ पाए यात्री

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कोरबा@M4S:जिले के यात्रियों के लिए हसदेव एक्सप्रेस जरूरी ट्रेन है। यहां के लोग अपनी राजधानी से सीधे जुड़ गए हैं। यह सुविधा मिलने से एक दिन में आसानी से अपना जरूरी काम निपटाकर वापस भी आ जाते हैं।
पिछले साल विस्तार की उम्मीद भी जागी, लेकिन रेलवे का प्रयास फाइलों में ही रह गया। इसके कारण लंबी अवधि बीतने के बाद भी ऊर्जाधानी के लोग इस्पात नगरी भिलाई और दुर्ग से नहीं जुड़ पाए हैं, जबकि शिक्षा, चिकित्सा, व्यवसाय व रोजगार की दृष्टि से दोनों दिशाओं के लोगों के लिए खास शहर है। बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं, लेकिन रायपुर के आगे की यात्रा उनके लिए कठिन हो जाती है। ज्ञात हो कि तत्कालीन केन्द्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल की पहल पर हसदेव एक्सप्रेस 6 अक्टूबर 2018 को शुरू हुई थी। यह गाड़ी तबसे रायपुर कोरबा रायपुर के बीच चल रही है। इससे एक दिन में लोग अपना सफर पूरा कर अपने घर पहुंच जाते हैं, जिससे बड़ी राहत मिल रही है, लेकिन चलने की पीड़ा भी दोनों दिशाओं के यात्रियों को है। इन यात्रियों को राहत दिलाने के साथ ही ट्रेन के परिचालन में किया जाने वाला अनावश्यक खर्च भी कम हो सकता है। इसके बाद भी 5 साल बीतने के बाद भी यह गाड़ी दुर्ग तक नहीं जा पाई है। हसदेव के रैक का रखरखाव बिलासपुर कोचिंग यार्ड में होता है, क्योंकि रायपुर में यह सुविधा नहीं है। सप्ताह में अलग-अलग दो दिन इस रैक को रायपुर से बिलासपुर कोचिंग यार्ड 110 किमी भेजा जाता है, जहां से मेंटेनेंस के बाद खाली रैक वापस रायपुर भेजा जाता है और वहां से यह गाड़ी रायपुर-कोरबा बनकर चलती है। इससे रेलवे पर अनावश्यक भार पड़ रहा है। यह भार दुर्ग तक विस्तार करने से कम किया जा सकता है, क्योंकि वहां कोचिंग यार्ड है, जहां पीएम हो सकता है, लेकिन जोन के अधिकारी अपने ही अधिकार क्षेत्र में गाड़ी को विस्तार देने से बच रहे हैं।

विद्यार्थियों को मिलती बड़ी सुविधा
भिलाई औद्योगिक केन्द्र के साथ एजुकेशन हब के रूप में जाना जाता है। तकनीकी, मेडिकल और उच्च शिक्षा के लिए हर साल बड़ी संख्या में जिले के युवा वहां जाकर पढ़ाई करते हैं। एक अनुमान के अनुसार करीब 4 हजार से अधिक छात्र भिलाई और दुर्ग में रहकर किसी न किसी क्षेत्र में अपना भविष्य गढ़ने की तैयारी में जुटे हुए हैं। बड़ी संख्या में लोग वहां रोजगार भी करते हैं। ये लोग सप्ताह में अवकाश के दिन अपने घर किसी तरह आ पाते हैं। अगर हसदेव एक्सप्रेस दुर्ग से चलाई जाती है तो इन्हें बड़ी राहत मिलेगी। अधिकांश जरूरतमंद छात्र हर दिन आना-जाना कर पाएंगे

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