बाल विवाह में शामिल कैटर्स, टेंट, बैंड सहित अन्य सुविधाएं देने वालों पर होगी कार्रवाई

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 कम उम्र में विवाह की रोकथाम के लिए चलाया जा रहा अभियान
कोरबा@M4S:शासन ने विवाह के लिए भले ही वर-वधु की आयु निर्धारित की है, लेकिन अभी भी कई ऐसे परिवार हैं जो कम उम्र में ही बच्चों के हाथ पीले कर देते हैं। ऐसे विवाह में शामिल होना ही नहीं बल्कि विवाह को यादगार बनाने कैर्ट्स, टेंट, बैंड व सजावट की जिम्मेदारी उठाने वालों की अब खैर नहीं रहेगी। दरअसल बाल विवाह में शामिल होना भी अपने आप में अपराध है। जिसके लिए कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ सजा का भी प्रावधान रखा गया है। जिले में बाल विवाह की रोकथाम के लिए सरकारी के अलावा समाजसेवी संस्था ने भी निगरानी शुरू कर दी है। यदि बाल विवाह कराने में संलिप्तता पाई जाती है तो कार्रवाई भी की जाएगी।
दरअसल 27 नवंबर को बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को 1 वर्ष पूरा हुआ है। जिसे लेकर 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान शुरू की गई है। इस अभियान के तहत कानून लागू करने वाली एजेंसियां जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर बाल विवाह की रोकथाम करने में जुट गए हैं। इसके लिए सतत निगरानी भी की जा रही है। चूंकि जिले की बड़ी आबादी गांवों में बसी हुई है। इनमें कई ऐसे गांव हैं जो सुदूर वनांचल क्षेत्र में स्थित हैं। इन गांवों में रहने वाले परिवार नियम कायदों से अनजान हैं। वे आज भी अपनी परंपरा को निर्वहन कर रहे हैं। जिसमें शादी-विवाह भी शामिल हैं। कई बार कम उम्र में बेटी-बेटे की शादी कराने के मामले भी सामने आते हैं। सूचना मिलने पर टीम गांव में पहुंचती है और बाल-विवाह को रोकते हुए समझाइश दी जाती है। इसके बावजूद पहले की अपेक्षा बाल विवाह के मामले में कमी तो आई है, लेकिन अभी भी परपंरा के नाम पर विवाह जारी है। इसी तरह मैदानी इलाकों में भी कुछ परिवार अपने बच्चों की शादी कम उम्र में करा देते हैं। इन परिस्थितियों से निपटने अभियान के तहत खास तैयारी की गई है। बताया जा रहा है कि बाल विवाह में मेहमानों को आमंत्रित किया जाता है। वर-वधु पक्ष के लोग शादी को खास बनाने कैटर्स, बैंड वाला, टेंट वाला सहित अन्य तैयारियां करते हैं। जिसमें मोटी रकम खर्च की जाती है। कई बार विवाह में रोक लगने से संबंधित परिवार को नुकसान भी होता है। अब बाल विवाह में शामिल होने वालों पर भी कार्रवाई तेज की जाएगी। इस संबंध में समितियों द्वारा प्रचार प्रसार भी किया जा रहा है।  बताया जा रहा है कि बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को एक साल पूरे होने पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जिसे तीन चरण में बांटा गया है। पहला चरण 31 दिसंबर तक चलेगा। जबकि दूसरे चरण का समापन 31 जनवरी को तीसरे और अंतिम चरण अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के दिन यानी 8 मार्च 2026 को होगा। इन तीनों ही चरणों में शिक्षक संस्थानों के अलावा विवाह संबंधी सेवाएं देने वाले केन्द्रों तक टीम पहुंचेगी।

जनप्रतिनिधि व कर्मचारियों से लेंगे सहयोग
जिले में बाल विवाह की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ विभिन्न विभागों की मदद भी ली जा रही है। यदि ग्रामीण क्षेत्र की बात करें तो बाल विवाह की रोकथाम जागरूकता को लेकर पंच, सरपंच, सचिव, मितानिन के अलावा आंगनबाड़ी केन्द्रों के कार्यकर्ता व सहायिकाओं को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। जैसे ही सूचना मिलती है जिला स्तरीय टीम भी मौके पर पहुंचेगी।

स्कूलों में पहुंच रही टीम
जिले में बाल विवाह को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए जिला बाल कल्याण व संरक्षण समिति के अलावा अन्य समितियां स्कूलों में भी पहुंच रही है। स्कूलों में बच्चों को बाल विवाह के कारण होने वाली समस्याओं से अवगत कराया जा रहा है। इसके साथ ही बाल विवाह नहीं करने संकल्प दिलाए जा रहे हैं। जिसके तहत दर्जनों स्कूलों के हजारों बच्चों से संकल्प लिया गया है।

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