नई दिल्ली(एजेंसी):। कटरीना कैफ (Katrina Kaif) आज किसी पहचान की मोहताज नहीं है। वह भले ही शादी के बाद से फिल्मों से दूर हों, लेकिन इतने सालों बाद भी उनकी गिनती बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेसेस में की जाती है। कटरीना न सिर्फ एक अच्छी पत्नी और सफल एक्ट्रेस हैं, बल्कि वह एक सक्सेसफुल बिजनेसवुमन भी हैं।
2008 में तमिलनाड़ु चली गई थी कटरीना की मां
बेटी की दौलत और शोहरत से दूर कटरीना की मां ने अपने लिए एक सरल जिंदगी चुनी है। कटरीना कैफ की मां सुजैन 2008 में तमिलनाडु में बस गई थीं, जहां उन्होंने रिलीफ इंडिया प्रोजेक्ट नाम के एक एनजीओ की स्थापना की। शुरुआत में उनका मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूल्स और ग्रामीण समुदायों के बच्चों को शाम की मुफ्त ट्यूशन देना था, लेकिन बीतते समय के साथ उन्होंने बड़े स्तर पर बच्चों की शिक्षा, उनके स्वास्थ्य और चाइल्ड प्रोटेक्शन को लेकर अन्य चीजों पर भी फोकस किया।
पिछड़े गांव के 300 से अधिक बच्चों को दी शिक्षा
साल 2015 में कटरीना की मम्मी ने एक माउंटेन व्यू स्कूल बनाया था, जिसे उन्होंने 30 से कम बच्चों के साथ एक नर्सरी के तौर पर शुरु किया था। अपने स्कूल में वह उन गांव के बच्चों को शिक्षा प्रदान करती हैं, जो आर्थिक रूप से पिछड़े गांव से ताल्लुक रखते हैं। इतने सालों में उन्होंने 300 से अधिक बच्चों के लिए नर्सरी और प्राइमरी स्कूल्स बना दिए हैं।
कटरीना कैफ ने एबीपी चैनल को दिए एक बहुत पुराने इंटरव्यू में मां के इस नेक काम के बारे में बात करते हुए कहा था, “मेरी मां मदुरै में रहती हैं, जहां उन्होंने बच्चों के लिए एक स्कूल शुरु किया था। वह टीचर हैं, बच्चों को वो वहां पर पढ़ाती हैं। मेरी मां वहां पर बहुत खुश हैं। उनकी चैरिटी और आशीर्वाद की वजह से ही मुझे आज ये मुकाम मिला है।”
गांव में मां से वीडियो कॉल पर नहीं कर पातीं बात
इसी पुराने इंटरव्यू में कटरीना कैफ ने ये भी बताया था कि उनकी मां लग्जरी लाइफ से खुद को बहुत दूर रखती हैं और अपनी जिंदगी को एन्जॉय कर रही हैं। मेरी क्रिसमस एक्ट्रेस ने कहा, “वहां पर रहना बिल्कुल भी आसान नहीं है, क्योंकि वहां पर बिजली नहीं आती है। गांव में सिर्फ 12 घंटे बिजली मिलती है। कभी मेरा मन कर जाता है कि मम्मी से वीडियो कॉल पर बात करूं, लेकिन वहां कभी बिजली नहीं होती, तो कभी वहां पर इंटरनेट नहीं होता। तो हम नॉर्मल कॉल पर बात कर लेते हैं।”
कटरीना कैफ ने यह भी शेयर किया था कि उनकी मां के इन नेक कामों के बारे में शुरु से ही वह वाकिफ थीं। चैरिटी और दूसरे लोगों की मदद करना वह शुरुआत से ही अपने घर में देखती आई हैं। यही नेकी के काम को देखकर वह बड़ी हुई हैं।





















































