रीफर्बिश्ड स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं? सेलर चुनने से लेकर हार्डवेयर टेस्टिंग तक जानिए जरूरी टिप्स

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नई दिल्ली(एजेंसी):मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों के बीच भारत और बाकी ग्लोबल मार्केट्स में स्मार्टफोन्स के दाम बढ़ रहे हैं, जिससे ज्यादा से ज्यादा बायर्स अब रीफर्बिश्ड स्मार्टफोन्स की तरफ रुख कर रहे हैं। हमेशा की तरह, Apple और Samsung के पुराने डिवाइसेस की डिमांड सबसे ज्यादा है। ज्यादातर डिवाइसेस को पूरी जांच, टेस्टिंग और जरूरत पड़ने पर रिपेयर के बाद दोबारा बिक्री के लिए लिस्ट किया जाता है। रीफर्बिश्ड मॉडल खरीदने से पैसे की बचत भी होती है और कम खर्च में बेहतर हार्डवेयर पर अपग्रेड करने का मौका भी मिल जाता है।

नए डिवाइस का पूरा प्राइस चुकाने के बजाय आप कम कीमत में कोई रीसेंट मॉडल खरीद सकते हैं। इसके बावजूद, रीफर्बिश्ड फोन खरीदने में कई तरह के रिस्क भी शामिल होते हैं। खरीदारी करने से पहले यूजर्स को सेलर की क्रेडिबिलिटी, डिवाइस के हार्डवेयर फीचर्स और वारंटी समेत कई फैक्टर्स को अच्छी तरह चेक करना पड़ता है।
सुरक्षित रीफर्बिश्ड फोन सेलर कैसे चुनें?

अपने इस्तेमाल के लिए रीफर्बिश्ड स्मार्टफोन मॉडल चुनने से पहले भी आपको एक भरोसेमंद सेलर चुनना होगा। सेलर सबसे पहली प्रायोरिटी इसलिए है क्योंकि केवल एक सही सेलर ही फोन की कंडीशन, उसकी हिस्ट्री, वारंटी और रिटर्न पॉलिसी के बारे में असली और सही डिटेल्स दे सकता है।

सबसे ज्यादा रेकमेंड किया जाने वाला ऑप्शन आमतौर पर मैन्युफैक्चरर-सर्टिफाइड रीफर्बिश्ड फोन होता है। Samsung जैसे बड़े स्मार्टफोन ब्रांड्स काफी कम कीमतों पर सर्टिफाइड रीफर्बिश्ड डिवाइसेस ऑफर करते हैं। Samsung का Certified Re-Newed प्रोग्राम यूजर्स को कम कीमत पर Galaxy S25 Ultra और Galaxy S25 जैसे मॉडल्स खरीदने का मौका देता है।

ब्रांड्स द्वारा सीधे बेचे जाने वाले पुराने फोन्स इन-हाउस इंस्पेक्शन, फंक्शनल टेस्टिंग और सॉफ्टवेयर वैलिडेशन से गुजरते हैं। कई ब्रांड्स बिक्री के लिए लिस्ट करने से पहले पुराना डेटा पूरी तरह हटा देते हैं और खराब पार्ट्स की जगह ओरिजिनल स्पेयर पार्ट्स लगाते हैं। इसके लिए आप सीधे कंपनी की वेबसाइट पर जाकर उसके ऑफिशियल रीफर्बिश्ड प्रोग्राम को चेक कर सकते हैं और ये कन्फर्म कर सकते हैं कि डिवाइस वैलिड वारंटी के साथ आ रहा है या नहीं। कुछ कंपनियां रीफर्बिश्ड फोन बायर्स को एक्स्ट्रा बेनिफिट्स और डिस्काउंट भी देती हैं।

डेडिकेटेड रीफर्बिश्ड फोन बिजनेस चलाने वाले नामी रिटेलर्स भी एक अच्छा ऑप्शन हैं। लेकिन खरीदारी करने से पहले आपको रिटेलर द्वारा दी जाने वाली डिवाइस कंडीशन, ग्रेडिंग और वारंटी की जांच करनी होगी। फ्यूचर रेफरेंस के लिए खरीदारी का पक्का बिल संभालकर रखना सबसे बेहतर रहता है। खरीदारों को रिटर्न या रिप्लेसमेंट पॉलिसी की जानकारी भी होनी चाहिए।

जो बायर्स पैसे देने से पहले खुद फोन को चेक करना चाहते हैं, वे किसी फिजिकल रीफर्बिशर स्टोर पर जा सकते हैं। सीधे स्टोर पर जाने से आपको हैंडसेट, डिस्प्ले, कैमरा और ओवरऑल कंडीशन खुद देखने में मदद मिलती है। इसी तरह, बायर्स को वारंटी, रिटर्न पीरियड और रीफर्बिशमेंट के दौरान इस्तेमाल किए गए रिप्लेसमेंट पार्ट्स की डिटेल्स को दोबारा जरूर चेक कर लेना चाहिए। ऐसे सेलर्स से सावधान रहें जो खरीद के लिए IMEI नंबर या पक्का बिल देने से मना करते हैं।

रीफर्बिश्ड फोन खरीदने से पहले क्या चेक करें?

खरीदारी पूरी करने से पहले, फोन की ध्यान से जांच करें और उसकी पहचान वेरिफाई करें। डिवाइस में दिखने वाले IMEI नंबर को चेक करें और बॉक्स या इनवॉयस पर प्रिंटेड IMEI से उसको कंपेयर करें। भारत में बायर्स Sanchar Saathi की CEIR सर्विस के जरिए IMEI का स्टेटस चेक कर सकते हैं।

iPhone खरीदने वालों को ये पक्का करना चाहिए कि सेलर ने अपने Apple अकाउंट से साइन आउट कर दिया है। वहीं Android बायर्स को चेक करना चाहिए कि फोन से पुराना Google अकाउंट हटा दिया गया हो।

अगर आप iPhone चुन रहे हैं, तो सेटिंग्स में जाकर बैटरी हेल्थ स्टेटस जरूर चेक करें। Android फोन्स की सेटिंग्स में भी बैटरी कैपेसिटी दिखाई देती है, हालांकि यह अलग-अलग मैन्युफैक्चरर्स के हिसाब से अलग हो सकती है।

रीफर्बिश्ड फोन की जांच करने के लिए यहां एक चेकलिस्ट दी गई है:
  • डिस्प्ले पर स्क्रैच और वर्टिकल लाइन्स चेक करें।
  • कैमरे, स्पीकर्स और माइक्रोफोन की अच्छी तरह जांच करें।
  • चेक करें कि सभी बटन्स, फिंगरप्रिंट सेंसर या Face ID सही से काम कर रहे हैं या नहीं।
  • पक्का करें कि फोन आपके सिम कार्ड और जरूरी नेटवर्क बैंड्स को सपोर्ट करता हो।
  • चेक करें कि डिवाइस पूरी तरह रीसेट हो चुका है और पिछले ओनर का कोई भी डेटा उसमें मौजूद नहीं है।
  • सेलर से पक्का इनवॉयस और वारंटी कार्ड जरूर मांगें।

बायर्स क्लासिफाइड लिस्टिंग्स या सीधे किसी इंडिविजुअल सेलर से फोन तभी खरीदें जब वे खुद जाकर फोन की फिजिकली जांच कर सकें। पेमेंट करने से पहले ये तय कर लें कि सेलेक्ट किया फोन किसी अकाउंट से लॉक तो नहीं है या फिर वह चोरी या गुमशुदा रिपोर्ट तो नहीं किया गया है। इसके अलावा, यूजर्स को सलाह दी जाती है कि जिस फोन की वे खुद जांच न कर सकें, उसके लिए कभी भी एडवांस पेमेंट न करें- खासकर तब जब सेलर कोई वैलिड बिल या मालिकाना हक का सबूत न दे पा रहा हो।

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