न्यूयॉर्क(एजेंसी):क्या कभी किसी दूसरी तकनीकी सभ्यता ने हमारी आकाशगंगा में अपने निशान छोड़े होंगे? विज्ञानी अब इस सवाल का जवाब रेडियो सिग्नल के साथ-साथ चांद की मिट्टी में भी तलाशने की संभावना पर काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि किसी बेहद उन्नत एलियन सभ्यता से निकला तकनीकी मलबा लंबे समय में अंतरिक्ष में फैलकर चांद की सतह तक पहुंच सकता है।
एसईटीआई (सर्च फॉर एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस) से जुड़े शोधकर्ताओं की एक नई स्टडी में इसी संभावना का अध्ययन किया गया है। शोध का नेतृत्व कैलिफोर्निया के माउंटेन व्यू स्थित एसईटीआई इंस्टीट्यूट के एफिलिएट साइंटिस्ट और बर्कबेक कॉलेज, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के शोधकर्ता लुईस पिनाल्ट ने किया है। स्टडी को ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एस्ट्रोबायोलाजी’ में पीयर रिव्यू के लिए भेजा गया है।
शोधकर्ताओं ने मॉडल तैयार कर यह समझने की कोशिश की है कि किसी उन्नत सभ्यता का बुनियादी ढांचा समय के साथ टूटकर बेहद छोटे कणों में बदल सकता है और अंतरिक्ष में फैल सकता है। ये कण दूसरे तारों के सिस्टम से गुजरते हुए हमारे सौर मंडल तक पहुंच सकते हैं और चांद की सतह पर जमा हो सकते हैं।
विज्ञानियों ने इन काल्पनिक कणों को दो नाम दिए हैं। माइक्रोन आकार के तकनीकी मलबे को यूक्रेनी शोधकर्ता एलेक्सी वी. आर्किपोव के सम्मान में ‘आर्किपोव पार्टिकल्स’ कहा गया है। वहीं, किसी एलियन सभ्यता द्वारा निगरानी या दूसरे कामों के लिए भेजी गई सूक्ष्म आटोनामस मशीनों को भौतिक विज्ञानी रोनाल्ड ब्रेसवेल के नाम पर ‘ब्रेसवेल पार्टिकल्स’ कहा गया है।
यह विचार नया नहीं है। आर्किपोव ने 1990 के दशक में ही सुझाव दिया था कि चांद एलियन आर्टिफैक्ट्स के संरक्षण का अच्छा स्थान हो सकता है। नई स्टडी ने इसी विचार को माइक्रोन स्तर के कणों पर केंद्रित करके आगे बढ़ाया है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, भविष्य के किसी चंद्र मिशन में करीब एक घन मीटर चांद की मिट्टी की बारीकी से जांच की जा सकती है। विशेष उपकरणों से उसमें ऐसे कृत्रिम कण तलाशे जा सकते हैं जिनकी संरचना प्राकृतिक पदार्थों से अलग हो।
हालांकि चुनौती बेहद बड़ी है। चांद पर पहले ही कई मानव निर्मित यान और उनके अवशेष मौजूद हैं। इसलिए कोई कृत्रिम कण मिलने पर यह साबित करना जरूरी होगा कि वह पृथ्वी से नहीं आया। इसके लिए उसके रासायनिक और भौतिक ‘फिंगरप्रिंट’ का विश्लेषण करना होगा।
विज्ञानियों का कहना है कि ऐसी खोज की संभावना फिलहाल बेहद कम है। लेकिन अगर चांद की मिट्टी में किसी बाहरी सभ्यता का विश्वसनीय टेक्नोसिग्नेचर मिल गया, तो यह मानव इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण विज्ञानी खोजों में से एक होगी।





















































