वाशिंगटन(एजेंसी):अमेरिका के मियामी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अमेजन का कार्गो बोइंग 767-300 विमान लैंडिंग के दौरान रनवे से बाहर निकल गया। इस दौरान विमान कई गाड़ियों से टकरा गया, जिसके कारण 5 लोगों की मौत हो गई। 5 अन्य घायल हुए हैं, जिनमें 3 की हालत गंभीर है।
कैसे क्रैश हुआ प्लेन?
घटना का वीडियो सामने आया है, जिसमें विमान को रनवे से आगे बढ़ते हुए दिखाया गया, जिसके बाद वह एयरपोर्ट के आसपास स्थित गोदाम कर्मचारियों और अन्य व्यवसायों द्वारा उपयोग किए जाने वाले क्षेत्र में जा गिरा। इसके बाद विमान में आग लग गई और उसमें से घना काला धुआं और आग की लपटें दिखाई दे रही हैं।
इस दौरान विमान अंत में दो सेमी-ट्रकों के पास सड़क के किनारे आकर रुक गया। वीडियो में विमान काफी हद तक ठीक दिख रहा है, लेकिन वह उल्टा और आग की लपटों में घिरा हुआ दिख रहा है।
208 किमी/घंटे थी विमान की रफ्तार
फ्लाइट रडार 24 के डेटा के मुताबिक, जिस वक्त विमान रनवे से बाहर निकला, उस वक्त उसकी स्पीड 112 नॉट यानी 129 मील प्रति घंटे (लगभग 208 किमी/घंटे) की थी। आइए जानते हैं कि लैंडिंग के दौरान ऐसी कौन सी स्थिति होती है, जिसके चलते विमान रनवे से बाहर निकल जाता है।
किस स्थिति में रनवे से बाहर चला जाता है विमान?
दरअसल, मियामी में हुई इस विमान दुर्घटना को ‘रनवे एक्सकर्शन’ कहते हैं। यह यह स्थिति तब बनती है जब कोई हवाई जहाज टेक-ऑफ या लैंडिंग के दौरान रनवे की तय सीमा में नहीं रुक पाता और उससे बाहर निकल जाता है।
इसमें दो कंडीशन होते हैं, एक वीर ऑफ, जब विमान अनियंत्रित होकर रनवे के दाएं या बाएं कच्ची जमीन/मिट्टी में चला जाता है। दूसरा ओवरशूट जब विमान रनवे की कुल लंबाई को पार करता हुआ उसके आखिरी छोर से आगे निकल जाता है। टेकऑफ की तुलना में लैंडिंग के दौरान इसका जोखिम सबसे अधिक होता है, क्योंकि प्लेन को बहुत तेज रफ्तार से घटकर पूरी तरह रुकना होता है।
किस स्थिति में होते हैं ऐसे हादसे?
रनवे एक्सकर्शन के पीछे आमतौर पर खराब मौसम, तकनीकी खराबी, या पायलट जिम्मेदार होते हैं। क्योंकि, रनवे पर पानी, बर्फ या तेल के कारण होने वाली फिसलन, लैंडिंग के समय असुरक्षित अप्रोच और जल्दबाजी में रनवे पर तय बिंदु से पहले या बहुत तेज रफ्तार में उतरना प्लेन को बेकाबू कर देता है।
क्या करना चाहिए ऐसे हादसों से बचने के लिए?
ऐसे हादसों से बचने के लिए आधुनिक एयरपोर्ट्स पर रनवे के अंत में ‘एरेस्टिंग सिस्टम’ लगाए जाते हैं। यह विमान को सोखकर रोक लेते हैं। इसके अलावा पायलटों को ऐसी स्थिति में लैंडिंग कैंसिल कर दोबारा उड़ान भरने (‘गो-अराउंड’) की भी ट्रेनिंग दी जाती है।





















































