दक्षिणी दिल्ली(एजेंसी):दिल्ली में दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस ने मो. इरशाद आलम उर्फ गुड्डू बादशाह की हत्या का मामला सवा महीने के भीतर सफलतापूर्वक सुलझा लिया है। गुड्डू बादशाह की 28 जुलाई को पुल प्रहलादपुर इलाके के लाल कुआं में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
गुड्डू को रास्ते से हटाने का प्लान
इसके तहत सवा महीने पहले पुल प्रहलादपुर में अपने साथियों के साथ मिलकर दोनों भाइयों ने पुल प्रहलादपुर इलाके में ताबड़तोड़ फायरिंग कर गुड्डू की हत्या की।
पुलिस के मुताबिक, 28 जुलाई को पुल प्रहलादपुर के लाल कुआं स्थित चुंगी नंबर तीन, डी-29 में गोलीबारी की घटना की सूचना मिली। मौके पर पहुंचने पर मो. इरशाद आलम उर्फ गुड्डू मृत पाए गए, जबकि मो. फारुख गोली लगने से घायल अवस्था में मिले।
खून से सने सबूत
क्राइम टीम और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। खून से सने सबूत, खाली कारतूस, कारतूस और धातु के प्रोजेक्टाइल बरामद किए गए। शुरुआत में मो. फारुख ने खुद को घायल पीड़ित के तौर पर पेश किया। हालांकि, विस्तृत पूछताछ, सीडीआर विश्लेषण, तकनीकी निगरानी, फील्ड इंटेलिजेंस और अन्य सबूतों से उसके बयानों में विसंगतियां सामने आईं और साजिश में उसकी कथित संलिप्तता का पता चला। उसे 28 जुलाई को गिरफ्तार कर लिया गया।
गोली मारकर हत्या
वहीं, जांच से पता चला कि यह हत्या कथित तौर पर मृतक और आरोपी शमशाद व अशफाक के बीच पुरानी रंजिश का नतीजा थी, जिसकी शुरुआत बिहार के सुपौल स्थित उनके पैतृक इलाके से हुई थी। आरोपियों ने गुड्डू बादशाह को खत्म करने की साजिश रची और लंबे समय से चले आ रहे विवाद को सुलझाने के बहाने उसे बिहार से दिल्ली बुलाया। कथित समझौता बैठक का इस्तेमाल एक जाल के तौर पर किया गया, जिसके बाद मृतक को लाल कुआं स्थित एक किराए के मकान में लाया गया और गोली मारकर हत्या कर दी गई।
जांच में यह भी पता चला कि अलग-अलग आरोपियों ने हमले की योजना बनाने, तालमेल बिठाने, आने-जाने की व्यवस्था करने, रहने की जगह का इंतजाम करने, हमले को अंजाम देने और सबूत छिपाने में अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं।
इनकी हुई है गिरफ्तारी
- मो. फारुख, 27 साल, पुल प्रहलादपुर, दिल्ली।
- मो. आफताब, सुपौल, बिहार का रहने वाला।
- मो. इरफान, 23 साल, साहिबाबाद, गाजियाबाद, यूपी।
- मो. शमशाद, 28 साल, सुपौल, बिहार।
- मो. अशफाक, 23 साल, सुपौल, बिहार।
- मो. रहमतुल्लाह उर्फ छोटू, 22 साल, सुपौल, बिहार।
- अमन यादव, 25 साल, लाल कुआं, पुल प्रहलादपुर, दिल्ली।
- मो. शोएब अख्तर, सुपौल, बिहार का रहने वाला।
(आरोपी शमशाद और अशफाक का आपराधिक इतिहास भी पाया गया, जिसमें सुपौल, बिहार में दर्ज हत्या के मामले में उनकी कथित संलिप्तता शामिल है।)
आरोपियों की रही ये भूमिका
- मो. फारुख ने कथित तौर पर मृतक का भरोसा जीता, उसे समझौता करने के बहाने किराए के मकान में बुलाया और दूसरे आरोपियों के बीच तालमेल बिठाने में मदद की। उसने खुद को एक निर्दोष घायल पीड़ित बताकर जांच को गुमराह करने की कोशिश की।
- मो. आफताब ने कथित तौर पर दूसरे आरोपियों के साथ तालमेल बिठाया और हमले को अंजाम देने वाली टीम के आने-जाने और इकट्ठा होने में मदद की। उसे तिरुपुर, तमिलनाडु में ढूंढा गया, जहां स्थानीय पुलिस की मदद से उसे पकड़ा गया।
- मो. इरफान ने कथित तौर पर अपराध के बाद पनाह/लॉजिस्टिकल मदद दी और अवैध हथियार व गोला-बारूद छिपाए। उसकी जानकारी पर एक अवैध पिस्तौल, एक अतिरिक्त मैगज़ीन और जिंदा कारतूस बरामद किए गए।
- मो. शमशाद कथित तौर पर मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक के रूप में सामने आया और इंटरनेट-आधारित कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म के ज़रिए दूसरे आरोपियों के संपर्क में रहा। उसके डिजिटल और कम्युनिकेशन लिंक की और पुष्टि की जा रही है।
- मो. अशफाक कथित तौर पर दूसरे साजिशकर्ताओं के संपर्क में रहा और अपराध से जुड़ी योजना बनाने और तालमेल बिठाने में शामिल रहा। आरोप है कि मो. रहमतुल्लाह उर्फ छोटू ने सुनियोजित हमले को अंजाम देने में हिस्सा लिया और बाद में अहम सबूतों को छिपाने या हटाने में मदद की।
- आरोप है कि मो. शोएब अख्तर कथित हमलावर टीम के सदस्यों के साथ तमिलनाडु से दिल्ली आने-जाने के दौरान उनके साथ था और बाद में सह-आरोपियों के साथ जुड़ा रहा।
- आरोप है कि अमन यादव ने लाल कुआं के पास सह-आरोपियों के लिए रहने और लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था की और बाद में पैसे के लालच में साजिश में शामिल हो गया। आरोप है कि घटना की रात वह अपनी मोटरसाइकिल पर आफताब, रहमतुल्लाह और शोएब के साथ गया और फायरिंग में शामिल हुआ। उसके द्वारा छिपाए गए हथियार और मामले से जुड़े अन्य सामान की बरामदगी की कोशिश कानून के अनुसार की जा रही है।
अरोपियों के पास से बरामदगी
- एक अवैध पिस्तौल
- एक अतिरिक्त मैगजीन
- कारतूस
- जांच से जुड़े अन्य अहम सबूत
आरोपी अमन यादव और फारुख द्वारा छिपाए गए 02 और अवैध हथियारों और मामले से जुड़े अन्य सामान की बरामदगी की कोशिश की जा रही है। वहीं, बरामद हथियार और कारतूस की फोरेंसिक व बैलिस्टिक जांच की जा रही है।





















































