मिशिगन प्राइमरी जीतकर अब्दुल अल-सईद ने रचा इतिहास, बन सकते हैं अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर

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वाशिंगटन(एजेंसी):अमेरिका अपने पहले मुस्लिम सीनेटर को चुनने के करीब पहुंच गया है। मिशिगन से डेमोक्रेटिक नेता अब्दुल अल-सईद ने 2026 चुनाव चक्र की सबसे चर्चित प्राइमरी में पार्टी के बड़े नेताओं के समर्थन वाली चार बार की प्रतिनिधि हेली स्टीवंस को हरा दिया है।

अगर अल-सईद नवंबर में रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हरा देते हैं, तो वह अमेरिकी राजनीति में 250 साल का रिकॉर्ड तोड़ देंगे। देश बनने के बाद से अब तक कोई मुस्लिम सीनेट के लिए नहीं चुना गया है।

पार्टी के खिलाफ जमीनी जीत

मिस्र-अमेरिकी डॉक्टर, रोड्स स्कॉलर, पॉडकास्टर और प्रोग्रेसिव नेता अल-सईद की जीत को डेमोक्रेटिक पार्टी के अंदर बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। स्टीवंस को सीनेट माइनॉरिटी लीडर चक शूमर, गवर्नर ग्रेटचेन व्हिटमर, सीनेटर गैरी पीटर्स और डेमोक्रेटिक पार्टी के ज्यादातर बड़े नेताओं का समर्थन था।

इजराइल-समर्थक समूहों ने भी उनके लिए करोड़ों डॉलर खर्च किए।वहीं कम पैसे वाले अल-सईद ने वॉलंटियर्स, छोटे दानदाताओं और बर्नी सैंडर्स, AOC, एलिज़ाबेथ वॉरेन जैसे प्रगतिशील नेताओं के समर्थन से बाजी पलट दी। उन्होंने कैंपेन में कहा कि कॉर्पोरेट पैसे ने अमेरिका को भ्रष्ट कर दिया है।

गाजा से लेकर मेडिकेयर तक
यह चुनाव सिर्फ एक सीट का नहीं, बल्कि डेमोक्रेटिक पार्टी की दिशा का भी मुकाबला बन गया।अल-सईद के मुद्दों में सभी के लिए मेडिकेयर, अमीरों पर ज्यादा टैक्स, राजनीति से कॉर्पोरेट पैसा हटाना और इजराइल को सैन्य सहायता बंद करना शामिल रहे। उन्होंने गाजा युद्ध को नरसंहार बताया।

कौन हैं अब्दुल अल-सईद?
डेट्रॉइट के पास जन्मे अल-सईद ने मिशिगन यूनिवर्सिटी, कोलंबिया और ऑक्सफोर्ड से पढ़ाई की। वह रोड्स स्कॉलर रहे और बाद में डेट्रॉइट स्वास्थ्य विभाग का नेतृत्व किया। 2018 में वह गवर्नर पद के लिए भी चुनाव लड़े थे। राजनीति में हार के बाद उन्होंने कंसल्टिंग की जगह जमीनी स्तर पर नेटवर्क बनाया।

डेमोक्रेटिक पार्टी में क्या बदला?
विशेषज्ञों का मानना है कि अल-सईद की जीत दिखाती है कि प्रगतिशील अर्थशास्त्र और सत्ता-विरोधी राजनीति अब सिर्फ तटीय शहरों तक सीमित नहीं है। मिशिगन जैसे स्विंग स्टेट में इस तरह की जीत पार्टी के भविष्य को लेकर बहस छेड़ देगी।

स्थापित नेता मानते हैं कि ऐसे उम्मीदवार स्विंग वोटर्स को नाराज कर सकते हैं। वहीं प्रगतिशीलों का कहना है कि सावधान मध्यमार्गी नीति से ही पार्टी बार-बार हार रही है।

नवंबर में अल-सईद की जीत या हार तय करेगी कि मिशिगन प्रगतिशील राजनीति की नई राह बनेगा या यह सिर्फ एक और उलटफेर रहेगा।

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