CJP प्रदर्शन में पुलिस एक्शन के खिलाफ सुनवाई से इनकार के दावों पर भड़के सीजेआई, कहा- याचिका दायर ही नहीं हुई

- Advertisement -

नई दिल्ली(एजेंसी):CJI सूर्यकांत ने शुक्रवार को उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने संसद चलो मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका को लिस्ट करने से इनकार कर दिया था।

कोर्ट ने CJI ने कहा कि ऐसी रिपोर्टें पूरी तरह से गलत हैं और गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग पर आधारित हैं।

CJI ने क्या कहा?

CJI सूर्यकांत ने कहा, पिछले दो दिनों में यह पूरी तरह से गलत बयान दिया गया कि कोई मामला दायर किया गया था। सुबह 10 बेज तक, एक भी पन्ना दायर नहीं किया गया था। यह केवल एक पत्र/अभ्यावेदन था। मैं उस पत्र को रिट याचिका कैसे मान सकता हूं।

उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद रजिस्ट्री की स्थिति की पुष्टि की थी। मिश्रा नाम के किसी व्यक्ति ने इसका जिक्र किया था। मीडिया ने गलत रिपोर्टिंग की कि मैंने मामले को लिस्ट करने से इनकार कर दिया। यह केवल एक पत्र था और लोगों ने बिना सोचे-समझे इसकी रिपोर्टिंग शुरू कर दी।

पत्र में क्या-क्या मांग की गई थी

वकील नरेंद्र मिश्रा ने CJI को लिखे पत्र में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने का अनुरोध किया था। इसमें NEET-UG 2026 पेपर लीक के विरोध के दौरान मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। पत्र में सादे कपड़ों में आए लोगों द्वारा हमले की जांच और ड्रोन फुटेज, बॉडी-कैमरा रिकॉर्डिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग भी की गई थी।

इस हफ्ते की शुरुआत में जब वकील ने तुरंत सुनवाई मांगी थी, तो CJI की बेंच ने कहा था कि कृपया हमारा समय बर्बाद न करें और अपना समय भी बर्बाद न करें। जस्टिस बागची और जस्टिस मोहना वाली बेंच ने वीडियो देखने से भी इनकार करते हुए कहा था, हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है। हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है।

इस बीच केंद्र सरकार ने छात्रों को न्याय दिलाने का भरोसा दोहराया। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा ने मेदांता अस्पताल में सोनम वांगुचक से मुलाकात कर प्रदर्शनकारी छात्रों की चिंताओं पर सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया था।

सरकार ने कहा कि वह संसद में पेपर लीक और परीक्षा सुधारों पर विस्तृत चर्चा कराएगी। जंतर-मंतर और 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान शांतिपूर्ण विरोध करने वालों के खिलाफ मामले दर्ज न करने पर भी सकारात्मक रुख है। साथ ही जिन छात्रों की कथित तौर पर आत्महत्या से मौत हुई उनके परिवारों को उचित मुआवजा देने पर विचार हो रहा है।

Related Articles