8TH PAY COMMISSION:OPS पर पीएम मोदी से क्या हुई थी बात? बीसी शर्मा का बड़ा खुलासा! DA से एरियर तक, खोले बड़े राज

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नई दिल्ली(एजेंसी):आठवां वेतन आयोग…ये सिर्फ 3 शब्द नहीं बल्कि खुशियों का वो फिटमेंट फैक्टर है, जिसका इंतजार लाखों कर्मचारी और पेंशनर्स बेसब्री से कर रहे हैं। खासकर तब, जब आठवां वेतन आयोग (8th Pay Commission) शहर-शहर घूम-घूमकर मीटिंग कर रहा है। ऐसे में कर्मचारियों और पेंशनर्स को इंतजार है- बढ़ी सैलरी का, पेंशन का और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS restoration demands) की बहाली का। करीब आठ महीने बीत गए हैं और यह इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा।

सवाल है कि आखिर आठवां वेतन आयोग कब मीटिंग्स का दौर खत्म करेगा? वो कब अपनी रिपोर्ट सौंपेगा? क्या आयोग कर्मचारियों की मांगों को मानेगा? ऐसे ही तमाम सवालों के जवाब दिए नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमैन (NFIR) के वर्किंग प्रेसिडेंट बीसी शर्मा ने। जागरण बिजनेस से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि आखिर ओपीएस को लेकर पीएम मोदी से उनकी क्या-क्या बातचीत हुई?

पेश है 10 सवालों में बातचीत के मुख्य अंश…

सवाल 1: आठ महीने बीत गए हैं, मीटिंग्स का दौर जारी है, आखिर आयोग अपनी रिपोर्ट कब सौंप सकता है?

बीसी शर्मा: आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय मिला है। आठ महीने बीत चुके हैं। आयोग अपना काम तेजी से कर रहा है। इस बार आयोग ने डिजिटल प्रक्रिया अपनाई है। इसकी वजह से आयोग तय समय से पहले भी अपनी रिपोर्ट दे सकता है। अगर ऐसा होता है तो तय समय से पहले बढ़ी सैलरी-पेंशन मिल सकती है।

सवाल 2: क्या सबसे बड़ी मांग फिटमेंट फैक्टर ही है? 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग क्यों की जा रही है?

बीसी शर्मा: हमारी सबसे बड़ी मांग 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की ही है। महंगाई, जीवन-यापन की लागत और कर्मचारियों की जरूरतों को देखते हुए यही उचित मल्टीप्लाई फैक्टर है। इसे किसी अनुमान के आधार पर नहीं बल्कि आईएलओ और डॉ. एक्रॉयड फॉर्मूले के आधार पर तैयार किया गया है। सातवें वेतन आयोग में कर्मचारियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला क्योंकि डीए बेसिक में मर्ज हो गया था। इस बार महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक और परिवार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 3.83 फिटमेंट फैक्टर ही न्यायसंगत होगा।

हमारी प्राथमिक मांगों में 3.83 फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम 69 हजार रुपए बेसिक वेतन, पूरा DA मर्जर, OPS जैसे लाभ, बेहतर HRA, पांच प्रमोशन, 6 प्रतिशत वार्षिक इंक्रीमेंट शामिल हैं, जो कर्मचारियों को मिलना ही चाहिए।

लेकिन बैठक में न तो OPS बहाली पर विस्तार से चर्चा हुई और न ही UPS या आठवें वेतन आयोग पर कोई बातचीत हुई। उम्मीद थी कि OPS पर गुड न्यूज मिलेगी। लेकिन उसी दिन शाम को UPS की घोषणा कर दी गई। और पीएम मोदी ने मीटिंग का फोटो पोस्ट करके कर्मचारियों के सामने हमें विलन बना दिया। कर्मचारियों को लगा कि हमसे बातचीत के बाद ही UPS को लागू किया गया है। 

बीसी शर्मा का कहना है कि कर्मचारियों की पहली पसंद आज भी OPS है। OPS में कर्मचारी के वेतन से कोई अंशदान नहीं कटता था और रिटायरमेंट के बाद अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलता था। इसके साथ ही न्यूनतम पेंशन, फैमिली पेंशन और कई अन्य सामाजिक सुरक्षा के प्रावधान भी थे।

जबकि NPS बाजार आधारित योजना है, जहां पेंशन कॉर्पस और बाजार के रिटर्न पर निर्भर करती है। UPS में कुछ सुधार जरूर किए गए हैं, लेकिन यह भी OPS जैसी सामाजिक सुरक्षा नहीं देता। इसलिए कर्मचारियों की मांग है कि चाहे नाम कुछ भी रखा जाए, लेकिन OPS जैसे सभी लाभ मिलने चाहिए।

सवाल 4: अगर OPS या 3.83 फिटमेंट फैक्टर नहीं मिला तो क्या होगा?

बीसी शर्मा: यदि कर्मचारियों की प्रमुख मांगें नहीं मानी गईं तो कर्मचारी संगठन आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। हल्लाबोल करेंगे। जरूरत पड़ने पर देशभर के कर्मचारी संयुक्त आंदोलन करेंगे।

सवाल 5: आठवें वेतन आयोग में एरियर मिलने पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्या सरकार पूरा एरियर नहीं देगी?

बीसी शर्मा: आठवां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा। और अगर बाद में लागू होता है तो पूरा एरियर कर्मचारियों को मिलना चाहिए। लेकिन सरकार स्पष्ट तारीख तय नहीं करती है तो कर्मचारियों को एरियर के मामले में नुकसान हो सकता है। सातवें वेतन आयोग के दौरान भी रिपोर्ट आने और वास्तविक भुगतान के बीच अंतर रहा था।

सवाल 6: कोविड में फ्रीज की गईं 3 डीए किश्तों को लेकर क्या मांग है?

बीसी शर्मा: कोविड काल में फ्रीज की गई तीन महंगाई भत्ता (DA) किश्तों को जारी किया जाना चाहिए। इससे कर्मचारियों को केवल तत्काल नुकसान नहीं हुआ, बल्कि भविष्य में वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी और नए वेतन आयोग के लाभ पर भी असर पड़ा है।

सवाल 7: फैमिली यूनिट भी एक बड़ा मुद्दा है, इसे लेकर क्या बदलाव मांगा गया है?

बीसी शर्मा: अभी वेतन निर्धारण में पति-पत्नी और दो बच्चों को तीन यूनिट माना जाता है। बीसी शर्मा का कहना है कि माता-पिता को भी परिवार का हिस्सा माना जाना चाहिए। इसलिए परिवार की गणना पांच यूनिट के आधार पर होनी चाहिए। उनका दावा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में भी माता-पिता को परिवार का सदस्य माना गया है।

सवाल 8: DA मर्जर पर आप क्या कहेंगे, पूरा मामला कहां फंसा है?

बीसी शर्मा: नया वेतन आयोग लागू होने से पहले पूरा महंगाई भत्ता (DA) बेसिक वेतन में मर्ज होना चाहिए। इसके बाद नई बेसिक सैलरी पर HRA, TA, नाइट ड्यूटी अलाउंस और अन्य सभी भत्तों की गणना की जानी चाहिए। उनका कहना है कि यही पुरानी व्यवस्था रही है और इस बार भी ऐसा ही होना चाहिए।

सवाल 9: DA बढ़ाने के फॉर्मूले में क्या बदलाव मांगा गया है? प्रमोशन और इंक्रीमेंट पर क्या मांग रखी गई?

बीसी शर्मा: अभी 12 महीने के औसत इंडेक्स के आधार पर DA तय होता है। NFIR की मांग है कि इसे घटाकर 6 महीने किया जाए ताकि कर्मचारियों को महंगाई का लाभ जल्दी मिल सके और वास्तविक बाजार दर के अनुसार DA तय हो। हर कर्मचारी को पूरी नौकरी में कम से कम पांच प्रमोशन मिलने चाहिए। इसके अलावा सालाना इंक्रीमेंट 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 6 प्रतिशत करने का प्रस्ताव भी आयोग को दिया गया है।

सवाल 10: रेलवे कर्मचारियों के लिए कौन-कौन से भत्ते बढ़ाने की मांग है और सबसे बड़ी चिंताएं क्या हैं?

बीसी शर्मा: HRA बढ़ाकर एक्स कैटेगरी शहरों में 40%, वाई में 35% और जेड शहरों में 30% किया जाना चाहिए। इसके अलावा ट्रैवल अलाउंस, नाइट ड्यूटी अलाउंस, सिटी कंपेंसटरी अलाउंस और अन्य भत्तों में भी संशोधन की मांग की गई है। रेलवे 24 घंटे चलने वाली सेवा है, इसलिए कर्मचारियों को उसके अनुरूप सुविधाएं मिलनी चाहिए।

भारतीय रेलवे में लाखों पद खाली हैं, जबकि नई ट्रेनें लगातार चलाई जा रही हैं। कई कर्मचारियों को 12-12 घंटे तक ड्यूटी करनी पड़ रही है। ट्रैकमैन, स्टेशन मास्टर, गेटमैन और ऑपरेटिंग स्टाफ पर लगातार काम का दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में भर्ती तेज करने और जोखिम भत्तों में सुधार की जरूरत है।

क्या हैं बीसी शर्मा की प्रमुख मांगें?

बीसी शर्मा के मुताबिक आठवें वेतन आयोग के सामने NFIR ने कई अहम सुझाव रखे हैं। इनमें 3.83 फिटमेंट फैक्टर, 69 हजार रुपए न्यूनतम बेसिक वेतन, पूरा डीए बेसिक में मर्ज करना, पांच यूनिट वाला फैमिली फॉर्मूला, हर कर्मचारी को पांच प्रमोशन, 6 प्रतिशत सालाना इंक्रीमेंट, HRA में बढ़ोतरी, नाइट ड्यूटी और ट्रैवल अलाउंस में संशोधन, 65 वर्ष की उम्र से अतिरिक्त पेंशन का लाभ, बिना ब्याज वाले एडवांस की बहाली और रेलवे कर्मचारियों के लिए बेहतर कार्य परिस्थितियां शामिल हैं।

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