नई दिल्ली(एजेंसी):भारतीय खान-पान में केसर की अपनी खास जगह है। इसकी खुशबू, रंग और स्वाद किसी भी डिश को रॉयल टच दे देता है। इसलिए मिठाइयों से लेकर कई तरह की बिरयानी में केसर का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, केसर काफी महंगा होता है और इसकी वजह है कि इसे उगाना काफी मुश्किल है।
जी हां, केसर की खेती के लिए खास मौसम और स्किल की जरूरत होती है और भारत में इसे ज्यादा जगहों पर उगाया भी नहीं जाता, लेकिन भारत में एक ऐसी जगह है जहां सदियों से केसर की खेती हो रही है। इसी जगह को भारत का सैफरन कैपिटल भी कहा जाता है। आइए जानें ये कौन-सी जगह है।
किस जगह को कहते हैं सैफरन कैपिटल?
ये जगह कश्मीर की घाटियों में बसी है और यहां के लोग सदियों से केसर की खेती कर रहे हैं। इस जगह का नाम है पाम्पोर। इसे कश्मीर का केसर टाउन भी कहा जाता है। इस कीमती मसाले को उगाने के लिए पोम्पोर की जलवायु, मिट्टी और ऊंचाई पर स्थित मैदान बेहतरीन माने जाते हैं।
पोम्पोर में आपको दूर-दूर तक फैले केसर के खेत नजर आएंगे और पतझड़ में ये नजारा और भी खूबसूरत हो जाता है, जब केसर के बैंगनी रंग के फूल खिलते हैं। केसर उगाने के लिए यहां सदियों पुरानी खेती के तरीके का इस्तेमाल किया जाता है और फिर हाथों से केसर के धागों को चुना जाता है।
इसलिए पोम्पोर में उगाया गया केसर काफी प्रीमियम क्वालिटी का माना जाता है। दिलचस्प बात है कि भारत का लगभग सारा केसर पोम्पोर या इसके आस-पास के इलाकों में ही उगाया जाता है।
क्यों खास माना जाता है पाम्पोर का केसर?
पोम्पोर में उगाया जाने वाला केसर गहरे लाल रंग का होता है और इसकी खुशबू काफी तेज होती है। इनमें क्रोसिन की मात्रा काफी ज्यादा होती है, जिसके कारण इसे इसका गहरा लाल रंग और स्वाद मिलता है। केसर की खेती भी काफी मुश्किल होती है।
इसके फूल बहुत कम समय के लिए खिलते हैं और इसी समय इसके हर धागे को बहुत सावधानी से हाथों से चुना जाता है और इन्हें सुखाकर केसर तैयार किया जाता है। केसर की थोड़ी मात्रा के लिए भी हजारों फूलों की जरूरत होती है। इसलिए केसर सबसे महंगे मसालों में से एक है।
दुनियाभर में मशहूर है पाम्पोर का केसर
केसर की खेती ईरान, स्पेन और ग्रीस जैसे देशों में भी की जाती है, लेकिन पाम्पोर के केसर को कोई टक्कर नहीं दे पाता। इसकी वजह है कि आज भी यहां केसर उगाने के लिए सदियों से चली आ रही पारंपरिक तकनीक का ही इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही, कश्मीर का मौसम इसकी खेती के लिए बिल्कुल परफेक्ट है, जिससे इसे बेहतरीन स्वाद, रंग और खुशबू मिलते हैं। अपनी इन्हीं खासियतों की वजह से साल 2020 में कश्मीरी केसर को जीआई टैग दिया गया, ताकि इसकी खासियत और प्रामाणिकता बनी रहे।







