आरा(एजेंसी):भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुई भरत भूषण तिवारी मुठभेड़ प्रकरण में शामिल पुलिसकर्मियों को न्यायिक जांच और राज्य मानवाधिकार आयोग की जांच के दौरान कई अहम सवालों का सामना करना पड़ सकता है।
विशेष रूप से आत्मरक्षा में की गई फायरिंग और उसमें एक से अधिक गोलियां चलाए जाने के दावे को लेकर जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की गहन पड़ताल करेंगी।
पुलिस का कहना है कि भरत भूषण तिवारी ने पुलिस टीम पर फायरिंग की थी, जिसके बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई। इसी कार्रवाई में वह घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई।
हालांकि, आत्मरक्षा में एक से अधिक गोलियां चलाने की आवश्यकता और परिस्थितियां अब जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गई हैं। नजरें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी टिकी है।
वैसे मुठभेड़ में घायल हुए भरत भूषण तिवारी का सदर अस्पताल, आरा में प्राथमिकी उपचार करने वाले डॉक्टर चार-पांच गाेलियां लगने का जिक्र कर चुके हैं, लेकिन नाजुक हालत को देखे घायल भरत को पीएमसीएच रेफर कर दिया गया था, जहां मौत हो गई थी।
सूत्रों के अनुसार, न्यायिक जांच में यह देखा जाएगा कि पुलिस ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन किया या नहीं, फायरिंग किन परिस्थितियों में की गई और बल प्रयोग परिस्थितियों के अनुरूप था या नहीं। मानवाधिकार आयोग की जांच में भी पूरे घटनाक्रम, पुलिस कार्रवाई और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा।
राज्य मानवाधिकार आयोग ने चार हफ्ते का समय देते हुए अगली सुनवाई की तिथि 13 जुलाई निर्धारित की है। इस मामले में पुलिस की ओर से फायरिंग और मुठभेड़ को लेकर दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। प्राथमिकी में भी आत्मरक्षा भरत पर चार गोलियां चलाने का जिक्र किया है।
अब जांच एजेंसियां इन एफआईआर, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बैलिस्टिक जांच और संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान के आधार पर पूरे प्रकरण की समीक्षा करेंगी।
उधर, मुठभेड़ को लेकर पहले से ही विवाद बना हुआ है और मृतक के स्वजन पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में न्यायिक जांच और मानवाधिकार आयोग की पड़ताल इस मामले में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
पुलिस का कमजोर पक्ष
- 16 जून को बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी द्वारा पुलिस पर पिस्टल तानकर धमकी दिए जाने के दौरान ही उसे किसी भी सूरत में गिरफ्तार कर लिया जाना चाहिए था, भले इसके लिए उसी दिन हल्का बल प्रयोग करना पड़ता।
- 17 जून को छत और बधार से पुलिस पर हो रही फायरिंग के दौरान ही आत्मरक्षार्थ तत्काल गोली चलाने या अन्य रणनीतिक विकल्प अपनाए जा सकते थे।
- हथियार फेंकने के बाद आत्मरक्षा में गोली चलाने के औचित्य पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- आत्मरक्षा में भी भरत भूषण तिवारी के शरीर पर एक से अधिक गोलियां चलाया जाना जांच का प्रमुख विषय बन गया है।
पुलिस का मजबूत पक्ष
- पिस्टलधारी भरत भूषण तिवारी को पुलिस ने लगातार दो-तीन बार आत्मसमर्पण का मौका दिया।
- 16 जून को पुलिस पर पिस्टल तानने और धमकी देने के बावजूद उसके खिलाफ तत्काल सख्त कदम नहीं उठाया गया।
- पुलिस ने शुरुआत में काफी संयम बरता और उसे गिरफ्तार कर इलाज कराने की बात कही।






